क्या हम अपने बच्चों के लिए एक हरा-भरा भारत छोड़ेंगे, या धूल, धुएं और सूखी नदियों का देश? यह सवाल आज किसी पर्यावरणविद् की चिंता भर नहीं है। यह आगरा की यमुना के किनारे खड़े हर नागरिक का सवाल है। यह हिमालय की गोद में बसे गांवों की चिंता है। यह उन लाखों लोगों का डर है जो हर सर्दी जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं...
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