बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

केरल, जिसे लंबे समय से कम्युनिस्टों का गढ़ माना जाता रहा है, जहां कभी कमल को मज़ाक में उगने वाली घास कहा जाता था, आज हर जगह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। हाल ही में, तिरुवनंतपुरम में, अमित शाह की ज़ोरदार मौजूदगी, और उनका वक्तव्य, कोई साधारण भाषण नहीं था, बल्कि 2026 के लिए साफ़ चुनावी संदेश था। कल्पना कीजिए, लाल झंडों के बीच कमल खिलते हुए। यह सपना नहीं, एक नई राजनीतिक कोशिश है।

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सुबह का अलार्म बजता है। प्राइवेट स्कूल के चपरासी बाबू लाल के मोबाइल की स्क्रीन पर “गुड मॉर्निंग” चमकती है, लेकिन उसके चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं है। घर के आंगन में पड़े अख़बार के पहले पन्ने पर भारत की तेज़ रफ़्तार तरक़्क़ी की सुर्ख़ियां हैं, जीडीपी, ग्रोथ, स्टार्टअप, ग्लोबल रैंक। घर के अंदर पत्नी ऊषा, रसोई में उबलता दूध भरोसे के साथ नहीं, शक के साथ देखती है। यह वही भारत है, जहां सपनों की उड़ान और ज़मीनी हक़ीक़त के बीच की खाई हर दिन चौड़ी हो रही है...

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शाम की सैर, ठंडी हवा, एक मासूम-सा मज़ाक, और अचानक एक कड़वी सच्चाई सामने आ गई। पार्क की पगडंडी पर टहलते हुए मेरी मुलाक़ात हमारे बेहद तहज़ीबदार बंगाली बैंक मैनेजर, चटर्जी बाबू से हो गई। हल्के-फुल्के अंदाज़ में पूछ लिया, “तो चटर्जी बाबू, 1 अप्रैल को रिटायरमेंट के बाद कोलकाता की ट्रेन पकड़ रहे हैं?”

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अमित शाह की कथित ‘मास्टरस्ट्रोक’ राजनीति ने बिहार में झंडा गाड़ दिया, अब सवाल यह है कि क्या वही हिंदुत्व की आंधी तमिलनाडु के द्रविड़ दुर्ग की मोटी दीवारों में दरार डाल पाएगी? या यह किला, हर बार की तरह, बाहरी हमलों को ठंडे आत्मविश्वास से झेल लेगा...

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साल 2026 की शुरुआत में कर्नाटक एक अजीब विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर राज्य की राजनीति कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संघर्ष, गुटबाज़ी और सत्ता-संतुलन की रस्साकशी में उलझी है, तो दूसरी ओर अर्थव्यवस्था पूरे वेग से आगे बढ़ रही है। सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच ठंडी लेकिन लगातार बनी रहने वाली तनातनी ने राजनीतिक माहौल को अस्थिर बना रखा है, फिर भी विकास की गाड़ी रुकी नहीं है...

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सुबह की धूप अभी हल्की थी। मेरठ जिले के एक गांव में किसान रमेश अपने खेत पर खड़े थे। मोबाइल हाथ में थामे, वह स्क्रीन पर चमकते मौसम अलर्ट पर नजर गड़ाए हुए थे, “आज सिंचाई नहीं।”, उन्होंने तुरंत मोटर बंद कर दी। मुस्कराते हुए बोले, “अब खेत आसमान देखकर नहीं, ऐप्प देखकर चलते हैं।

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