बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

मथुरा में यमुना किनारे शाम ढल रही है। आरती की घंटियां बज रही हैं, अगरबत्तियां जल रही हैं, पुजारी मंत्रोच्चार कर रहे हैं, और सैकड़ों श्रद्धालु पवित्रता व मोक्ष की कामना में एकत्र हैं। लेकिन, गेंदा फूलों की महक के उस पार एक कड़वी हक़ीक़त है, प्लास्टिक कचरा यमुना में तैर रहा है, रासायनिक झाग डरावने अंदाज़ में चमक रहे हैं, और यह नदी, जो करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है, उपेक्षा के बोझ तले कराह रही है। यही दृश्य गंगा, कावेरी, नर्मदा के किनारों पर देखने को मिल सकते हैं...

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अगली बार किसी मासूम निर्भया को मरते देखें, या सुनें तो जरूर सवाल करें कि क्या संस्कारी देशवासियों का जमीर मर चुका है, क्या आज के भारत में स्त्रियां अपनी मर्जी से जी सकती हैं, क्या परिवारों, मोहल्लों, स्कूलों और पुलिस थानों में लड़कियां सुरक्षित हैं...

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हमारा धर्म साझा विश्वासों, मूल्यों और परंपराओं के जरिए राष्ट्र को एकजुट कर सकता है। जब किसी देश में धर्म को राष्ट्र की नींव के रूप में देखा जाता है, तो यह सांस्कृतिक एकता और सामूहिक उद्देश्य की भावना को मजबूत करता है...

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आगरा के ताज व्यू अपार्टमेंट्स में रहने वाली गृहणी पद्मिनी दीवाली की तैयारियों में व्यस्त थीं। ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से तंग आकर उन्होंने देर शाम एक ऑनलाइन दीवाली डील देखी और ‘अभी ऑर्डर करें’ पर क्लिक कर दिया। उन्हें क्या पता था कि वह भारत के रिटेल की नई कहानी का हिस्सा बन रही थीं! कुछ ही मिनटों में, फूल, दीये, लाइट्स, फल, और मिठाइयां, सब कुछ पैक होकर उनके घर पहुंच गया। एक युवा बाइक राइडर लाया सामान, और यूपीआई से पेमेंट लेकर चला गया...

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आगरा आने वाले पर्यटकों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित फेरी या क्रूज सेवा का सपना जल्द ही सच हो सकता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा समर्थित और स्थानीय नदी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रचारित इस प्रस्ताव से आगरा के पर्यटन परिदृश्य में क्रांति आ सकती है। साथ ही, कई आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ भी मिल सकते हैं।

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मीडिया में लाइन से विज्ञापनों की कार्पेट बॉम्बिंग, ज्वेलरी शॉप में देर रात तक खरीदारी, रिकॉर्ड सेल के दावे, कीमतों में बेहिसाब इजाफा, भारत को सोने की चिड़िया बनाने को बेताब हैं! लेकिन यह चमक, यह दमक, आर्थिक कमजोरी, वैश्विक असंतुलन, भरोसे में सेंध की महक है। दया, कुछ तो गड़बड़ है!

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