बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

बीते दिनों नई दिल्ली में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिला। यह मुलाकात सिर्फ कॉफी और इडली-वड़ा के साथ हुई एक आम बैठक नहीं थी, बल्कि इसे एक राजनीतिक दिशा परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। जाहिर है नेताओं ने घर वापसी की एक रणनीतिक योजना के साथ मुलाकात की होगी जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में वापसी और 2021 के चुनाव में सत्ता गंवाने वाली गलती को सुधारने का प्रयास होगा। 

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विपक्षी भी मानते हैं कि राज्य में जंगल राज खत्म हुआ है। बुलडोजर मॉडल और ‘एनकाउंटर स्ट्रेटजी’ से अपराधियों का मनोबल टूटा है। राजनैतिक हस्तक्षेप और प्रोत्साहन में भी कमी देखी जा रही है।

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ताज के शहर आगरा को आखिरकार एक युद्ध स्मारक मिलने जा रहा है। यह एक ऐसी श्रद्धांजलि होगी जिसकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी। आगरा नगर निगम ने शहर में एक भव्य युद्ध स्मारक बनाकर भारत के वीर सैनिकों के बलिदान का सम्मान करने के अपने निर्णय की घोषणा की है।

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बिहार के बाद केरल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन, राजनीतिक माहौल अभी भी उम्मीद के मुताबिक गर्म नहीं हुआ है। लाल झंडों की मौजूदगी और छोटे कस्बों में हो रही सभाओं के बावजूद चुनावी चर्चा अभी शुरू नहीं हुई है। गुरुवायूर मंदिर के बाहर कॉफी स्टॉल पर राजनीति के बजाय फुटबॉल और खाड़ी देशों में घटते रोज़गार की चिंता लोगों की बातचीत का मुख्य विषय देखा जा रहा है। 

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डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीतियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ज़लज़ला ला दिया है। अर्थशास्त्री ‘ग्लोबल साउथ’ पर इसके विनाशकारी प्रभावों की चेतावनी दे रहे हैं। भारत जैसे देश, जो अभी-अभी आर्थिक विकास की राह पर चले ही थे कि अब वे इस तूफ़ान की चपेट में आ रहे हैं। क्या धमकियों और लेन-देन पर आधारित विदेश नीति से अमन कायम हो सकता है? यह सवाल दुनियाभर के नेताओं के ज़ेहन में अब गूंज रहा है।

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पिछले दो दशकों में हमने एक पूरी जमात को गुम होते देखा है। वह जमात जो हमें हंसाती थी, गुदगुदाती थी, और सोचने पर मजबूर करती थी। व्यंग्यकार, कार्टूनिस्ट, और हास्य के बादशाह अब धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं...

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