बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

दीपावाली के अवसर पर अधिकांश त्योहारी बधाई और शुभकामना संदेश अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से दूर करने की बात करते हैं। लेकिन हकीकत में, वर्तमान युग में आस्था और भक्ति के नाम पर रूढ़िवादिता, पाखंडी अंधविश्वास और संकीर्णता को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह देखने की होड़ लगी हुई है कि कौन सबसे ज्यादा नफरत, द्वेष और दूरियां बढ़ा सकता है...

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हाल ही में, आगरा नगर निगम ने जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी का नाम बदल दिया, लेकिन पाठकों को आकर्षित करने और पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कोई कार्यक्रम घोषित करने में विफल ही रहा।

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आगरा के प्रतिष्ठित जापान के सहयोग से स्थापित जालमा संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान को पिछले पचास वर्षों में वह मान्यता नहीं मिली है जिसका यह हकदार है।

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जैसे-जैसे सर्दी करीब आ रही है, समूचे क्षेत्र को विभिन्न पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पराली जलाने, सूखी यमुना नदी के तल से धूल उड़ने, कचरा जलाने और भारी प्रदूषणकारी वाहनों के प्रवेश से समस्याएं और भी बढ़ गई हैं।

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नाम बदलने के मौजूदा चलन में, रॉयल कुरूपतिस्तान सरकार ने ‘रॉटनपुर विश्वविद्यालय’ का नाम बदलकर ‘अज्ञानपुर विश्वविद्यालय’ कर दिया है...

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उफ्फ, इतना शोर! कैसे झेलते हैं आगरावासी...! यमुना किनारा रोड पर जाम में फंसी एक अमेरिकन म्यूजिक टीचर बैट्सी ने झल्ला कर कहा। इधर ट्रक वाले, उधर बस वाले, पीछे जुलूस का बैंड, नहा-धोकर लौट रही भैंसें, अद्भुत दृश्य दिखता है महताब बाग से बैटरी रिक्शे में बैठे पर्यटकों को...

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