सेवा के काम में शोर नहीं, असर होना चाहिए। लेकिन, आज के समय में असर से पहले पोस्ट आ जाती है। गौर से देखें, समाजसेवा भी कुछ-कुछ क्रिकेट मैच जैसी हो गई है। सबकी नज़र स्कोरबोर्ड पर है; किसने सबसे पहले ट्वीट किया? किसने फेसबुक पर ‘ब्रेकिंग’ डाली? किसने फोटो के साथ लिखा; “मेरे प्रयासों से…”
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