अध्किारियों की मिली भगत से पनप रहा अवैध् शराब का कारोबार

कर्मचारी से लेकर अध्किारी तक भ्रष्टाचार में लिप्त

अनुज्ञापी कतरा रहें है नवीनीकरण कराने से

मथुरा। हरियाणा से तस्करी कर लाई जा रही और रिपफलिंग कर बेची जा रही शराब ने भले ही लाइसेंसी दुकानदारों को बड़ी संख्या में शराब दुकान चलाने से तौबा करा दी हो, और राजस्व को चूना लगा है लेकिन आबकारी महकमें से जुड़े लोगों की माली हालत जरूर पुख्ता हो गई हो गई हैं। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में लाइसेंसियों ने जिला आबकारी अध्किारी की मनुहार के बाद भी अपने लाइसेंसों का रिनुअल नहीं कराया। पुराने राजस्व दर पर भी देशी, विदेशी मदिरा तथा बीयर शाॅप मालिक एवं मार्डन शाॅप संचालक भी अब मदिरालय चलाने से तौबा कर चुके हैं। ज्ञात रहे जनपद में देशी, विदेशी मदिरा एवं बीयर दुकानों सहित माॅडल शाॅप संचालकों ने बड़ी संख्या में जिला आबकारी कार्यालय के निर्देशों के बावजूद अपनी दुकानों का नवीनीकरण नहीं कराया, जिनमें 152 देशी शराब की दुकानें, इंग्लिश वाइन शाॅप 123 तथा बीयर की 82 दुकानों सहित 6 माॅडल शाॅप सहित कुल 363 शराब व्यापार से जुड़े लाइंसेंसियों ने अपनी दुकानों का नवीनीकरण नहीं कराया है, जबकि आबकारी महकमें ने पुरानी दरों पर भी नवीनीकरण करने के लिए दुकानदारों से मनुहार और खुशामत के बाद भी वह इस ध्ंधे से तौबा कर रहे हैं। जनपद में शराब का बड़े पैमाने पर काम कर चुके एक लाइसेंसी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक तो सरकार द्वारा लाइसेंस पफीस में ही जबरदस्त बढ़ोत्तरी कर रखी है, वहीं सरकार के नियमों को दर-किनार कर स्थानीय अध्किारियों द्वारा पास-पास दुकानें खोल देने से बिक्री दिन-प्रतिदिन गिर रही थी और इस सबके बाद पड़ौसी राज्य हरियाणा से शराब की तस्करी बढ़ना लाइसेंसियों के लिए कोढ़ में खाज पैदा कर रहा है। उक्त लाइसेंसी का कहना है कि जो दुकानें रिनुअल कराई गई हैं, वो भी हरियाणा से तस्करी कर लाई गई शराब को यहां री-पैक कर बिक्री कर मुनापफा कमा रहे है कई बार छापे के दौरान पकड़े जाने पर भी अध्किारियों द्वारा सैटिंग गैटिंग कर अवैध् वसूली के चलते इन लोगों के विरुद्व कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिससे ईमानदारी से काम करने वाले लाइसेंसी इस ध्ंध्े से दूर जाने को मजबूर हुए। उक्त लाइसेंसी का दावा है कि कई दुकानदार 8 से 10 लाख रुपए प्रति दुकान नुकसान उठाने के बाद लाइसेंस नवीनीकरण के लिए राजी नहीं हुए। उक्त लाइसेंसी ने दावा किया उसके दामन पर कोई दाग नहीं, पिफर भी अवैध् वसूली के चलते और दुकान में घाटा जाने के कारण वह दुकान छोड़ने को मजबूर हुआ। अब आबकारी विभाग नए लोगों को किसी तरह बरगलाकर दुकानें उठाने की कवायद में लगा है, लेकिन ढूढंे से दुकानों को लेने वाले लाइसेंसी नहीं मिल रहे। क्योंकि जनपद से सटें हुए हरियाणा में शराब के दाम और प्रदेश के दामों में भारी अन्तर के चलते विगत कई वर्षो से हरियाणा से शराब की अवैध् आवक जारी है और इसमें विभागीय क्रमचारी से लेकर अध्किारीगण तक सम्मलित बताये जाते हैं और इसका प्रमाण भी सापफ तौर पर देखा जा सकता है कि वृन्दावन अवैध् शराब व मादक पदार्थो की सबसे बढ़ी मंडी बन चुका हैं लेकिन जब जब आबकारी विभाग के अध्किारी वृन्दावन में छामापार कार्यवाही को जाते है तो उससे पहलें ही इसकी सूचना इन शराब मापिफयाओं को मिल जाती है और विभाग खाली हाथ लौटकर कार्य की मूक इतिश्री दर्शा देता हैं। जबकि जिस क्षेत्रा में विगत कई सालों में छापामार कार्यवाही कर आबकारी विभाग को एक ग्राम चरस अपफीम और शराब नहीं बरामद हुई वहीं महज एक घंटे के अन्दर मांट पुलिस स्थानीय मथुरागेट चैकी के पीछें स्थित शराब मापिफया के यहाॅ से लाखों रूपयें की शराब चरस व गाजा सहित अवैध् नगदी बरामद की थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि आबकारी विभाग में कर्मचारी से लेकर अध्किारी तक भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूबें हुए हैं।


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