वह दौर गुलामी का था। उस समय जंगल के भीतर बिरसा मुंडा, ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध प्रतिरोध का सबसे सशक्त स्वर बनकर उभरे थे। उन्होंने आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए ही कदम नहीं उठाया, बल्कि उन्हें आर्थिक,सामाजिक और शैक्षिक रूप से सबल बनाने के लिए भी हरसंभव प्रयास किया। पूरा आलेख पढ़ने के अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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