नई दिल्ली । राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में मुस्लिम पक्षकार हामिश अंसारी का निधन हो गया है। फैजाबाद में 96 साल की उम्र में हाशिम अंसारी ने अंतिम सांस ली। अंसारी लंबे समय से बढती उम्र के कारण बीमार चल रहे थे जिसके बाद कल देर रात उन्होंने अयोध्या में अंतिम सांस ली। 1949 से वो इस मुद्दे की पैरोकारी कर रहे थे। मैं फैसले का भी इंतजार कर रहा हूं और मौत का भी लेकिन यह चाहता हूं मौत से पहले फ़ैसला देख लूं। ये शब्द थे 90 साल के बुज़ुर्ग हाशिम अंसारी के। साठ साल से बाबरी मस्जिद की क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे 90 वर्षीय हाशिम गज़ब के जीवट के आदमी थे।
हाशिम अयोध्या के उन कुछ चुनिंदा बचे हुए लोगों में से थे। जो लगातार 60 वर्षों से अपने धर्म और बाबरी मस्जिद के लिए संविधान और क़ानून के दायरे में रहते हुए अदालती लड़ाई लड़ रहे थे। मैं सन 1949 से मुक़दमे कि पैरवी कर रहा हूं। लेकिन आज तक किसी हिंदू ने हमको एक लफ्ज़ ग़लत नहीं कहा। हमारा उनसे भाई चारा है। वो हमको दावत देते हैं। मै उनके यहां परिवार के साथ दावत खाने जाता हूं। हाशिम अंसारी कहा करते थे कि स्थानीय हिंदू साधु-संतों से उनके रिश्ते कभी खऱाब नहीं हुए। मै जब भी उनके घर गया, हमेशा अड़ोस-पड़ोस के हिंदू युवक चचा-चचा कहते हुए उनसे बात करते हुए मिले।
साभार-khaskhabar.com






Related Items
अयोध्या और वाराणसी के लोकसभा चुनाव परिणामों पर संतों की राय
सुनें : बिहार में मुस्लिम-यादव गठजोड़ का है यह हाल...
अयोध्यावासियों की नजरों में अब ऐसी है अयोध्या...