दीपक एक युवक है जो कुल्लू में एक स्थानीय रेस्टोरेंट में बरतन धोने का काम करता है। उसकी आंखों की रोशनी चली गई है। आंखों की जांच के बाद उसे पता चला कि उसकी दृष्टि लौट सकती है, किन्तु इसमें हजारों रुपये लग सकते हैं।
दीपक एक युवक है जो कुल्लू में एक स्थानीय रेस्टोरेंट में बरतन धोने का काम करता है। उसकी आंखों की रोशनी चली गई है। आंखों की जांच के बाद उसे पता चला कि उसकी दृष्टि लौट सकती है, किन्तु इसमें हजारों रुपये लग सकते हैं।
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