मथुरा । सपा, कांग्रेस, रालोद पार्टियों में प्रदेश में चुनावी गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं को अगर बल मिला और तीनों दल मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लडे तो सपा के घोषित प्रत्याशीयों को हटाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि मथुरा-वृन्दावन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक प्रदीप माथुर हैं, जो कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता भी हैं और सिटिंग विधायक भी हैं। इसलिए इस सीट पर घोषित सपा उम्मीदवार डा.अशोक अग्रवाल जो मामूली वोटों से गत चुनाव हार गये थे उनकी उम्मीदवारी वापस हो सकती है। इसी दिशा में छाता विधानसभा से वर्तमान विधायक ठाकुर तेजपाल सिंह हैं जो रालोद से विधायक हैं पर वह वर्तमान में रालोद में नहीं हैं। अगर सपा से रालोद का बठबंधन हुआ तो रालोद अपना दावा कर सकता है। क्योंकि यह सीट उसके ही सिटिंग विधायक की सीट है और फिर सपा से घोषित उम्मीदवार लोकमणि कांत जादौन जोकि गत चुनाव भी सपा प्रत्याशी के रूप में लडे थे और अब भी सपा से घोषित उम्मीदवार हैं, उनके नाम को सपा वापस ले सकती है। किंतु इस दिशा में श्री जादौन का दावा है कि वह गठबंधन होने पर भी प्रत्याशी होंगे यह सीट रालोद को नहीं जायेगी। क्योंकि उसके दल का वर्तमान विधायक उस दल में नहीं है और रालोद से ज्यादा आज की तारीख में सपा का वजूद है। इस क्षेत्र में हम ही थे और गठबंधन में भी रहेंगे। यही हाल मांट विधानसभा सीट का बताया गया। जानकारों का मानना है कि अगर प्रदेश में सपा, कांग्रेस, रालोद का गठबंधन हुआ तो मथुरा की पांचों विधानसभा सीटें सपा अपने सहयोगी दलों को दे देगी। जिसमें कांग्रेस मथुरा-वृन्दावन पर तथा बाकी पर रालोद अपना दावा करेगा। गत चुनाव में मिले वोटों और अपने दल के प्रत्याशियों को मिले वोटों को देखते हुए मानना पडेगा। अगर गत लोकसभा चुनाव की तुलना की जाये तो भी रालोद का सपा से ज्यादा मथुरा की सीटों पर दावा बनता है। इसे सपा को मानने पर विवश होना पडेगा। अब प्रश्र यह कि अगर अखिलेश वाली सपा से गठबंधन हुआ और मुलायम सिंह की सपा ने अपने प्रत्याशी उतार दिये तो जिले में इस गठबंधन पर असर पडना लाजमी है।





