गुरूपूर्णिमा पर हुआ व्यासजी का जन्मोत्सव

मथुरा। श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति मथुरा ने वृन्दावन दरवाजा स्थित कृष्ण गंगा घाट पर महर्षि वेद व्यास के उस स्थान पर जन्मोत्सव मनाया जहां व्यास जी ने अटठारह पुराणों की रचना की थी। ऋषि वेदव्यास महाभारत ग्रंथ के रचयिता थे। वेदव्यास महाभारत के रचयिता ही नहीं, बल्कि उन घटनाओं के साक्षी भी रहे हैं, जो महाभारत में घटी हैं प्रत्येक द्वापर युग में विष्णु व्यास के रूप में अवतरित होकर वेदों के विभाग प्रस्तुत करते हैं। पहले द्वापर में स्वयं ब्रह्मा वेदव्यास हुए, दूसरे में प्रजापति, तीसरे द्वापर में शुक्राचार्य, चैथे में बृहस्पति वेदव्यास हुए। इसी प्रकार सूर्य, मृत्यु, इन्द्र, धनजंय, कृष्ण द्वैपायन अश्वत्थामा आदि अट्ठाईस वेदव्यास हुए। इस प्रकार अट्ठाईस बार वेदों का विभाजन किया गया। उन्होने ही अट्ठारह पुराणों की भी रचना की, ऐसा माना जाता है। श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति के तत्वावधान में प्रसिद्ध संत राजा बाबा की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें बाबा ने इस स्थान तथा वेद व्यास जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला और विद्वान पं. विजय कृष्ण आचार्य ने पूजा अर्चना कराई इस अवसर पर वेद व्यास की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया गया तथा प्रसाद आरती की गई इस अवसर पर समाज के प्रमुख गणमान्य आचार्य पंडित उपस्थित थे राजा बाबा, सोहन लाल कातिब, गोवर्धन दास अग्रवाल, अमित भारद्वाज, योगेश उपाध्याय आवा, दिवाकर आचार्य, संजय शर्मा, पं. उमेश दीक्षित, पत्रकार सुनील शर्मा, बाॅके लाल, हरी बाबू शर्मा, राधाबिहारी गोस्वामी, बृषभान गोस्वामी, राजेश उपाध्याय, औंकार नाथ, बृजमोहन यादव, गोपाल शर्मा, विजय कृष्ण आचार्य, विनोद कुमार शर्मा, रामदत्त शर्मा, हरे कृष्ण अग्रवाल, बाॅके लाल राजोरिया, अर्पित अग्रवाल, आदि उपस्थित थे।


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