सविता पाण्डेय छोटे.छोटे पालनों में झूलतींण्ण्ण् गुलाबी कपड़ों में लिपटीं नवजात बच्चियां। डॉक्टरों की लाख मनाही के बावजूद किसी.किसी की आंखों में लगे मोटे.मोटे काजलों के बीच गुपचुप ताकती लड़कियां। हुह! ढीठ लड़कियां। देखो तो कैसे घूर रही हैं। सबकी सब एक साथ। घूरती रहो सब मिलकरए मैं नहीं डरने वाली। जन्म नहीं दूंगी एक और लडक़ी। लता बुदबुदायी। जब से अल्ट्रासांउड की रिपोर्ट आई है और लता को पता चला है कि सेक्स फीमेल हैए उसके खयालों में इसी तरह आती रहती हैं दृ लड़कियांए गुलाबी कपड़ों में लिपटींए उसे डराती सी। लता उन सबका सामना नहीं कर सकती। डरती है सचमुच डरती हैए कि इनकी जिदए गुस्से के आगे झुकना ना पड़े। डॉक्टर ने सप्ताहभर बाद अबॉर्शन की डेट दी है और वह जो उसके अंदर पल रही हैए वह तो जैसे दिन भर में कई.कई बार उसे लानतें भेजती रहती है. आने दो न इस सुंदर दुनिया में केतकी का फूल बन खिल जाऊंगी तुम्हारे घर मेंए मुझे नहीं भाते केतकी के फूल। काट डालूंगी तुम्हारी जड़ें मैं। लता बोली। मार दोगी तुम मुझेघ् हां! हां! मुझे नहीं चाहिए एक और लडक़ी। तुम मुझे नहीं मार सकती। मुंह नोंच लूंगी मैं तुम्हारा।
बित्तेभर की लडक़ी और गजभर की जुबान। अभी तो दुनिया भी नहीं देखी और मुंह नोंचने की बात करती है। गुस्से से चेहरा कैसा लाल था. मानो अभी खून टपक पड़े। लता को तो अपनी दुनिया में सिर्फ दो बच्चे चाहिए। दो बच्चे कितने काम लगते हैं दो बच्चें. एक लडक़ाए एक लडक़ी। छोटा परिवार दो बच्चों का परिवार। लेकिन दो लड़कियां। कितनी अधिक होती हैं दो लड़कियां। पूरे घर को भर देती हैं दो लड़कियां। दो लड़कियां पूरे घर में फैल जाती हैं।
दो लड़कियों की एक साथ उच्चरित आवाज असह्य हो जाती है। दो लड़कियां दिनभर उधम मचाती हैं। दो लड़कियां लड़ती हैं झगड़ती हैं। जिद्दी लड़कियां। नकचढ़ी लड़कियां। दो लड़कियां टेपरिकॉर्डर के संगीत की तेज आवाज में दिनभर नाचती हैं।
अभी अबॉर्शन में दिन शेष हैं। लता पांच साल की रिमी के साथ लेटी है कि वह फिर आ जाती है। वही जो अभी भ्रणू रूप ही है। वहीं जो हर पल यह रंगीन दुनिया देखने को व्याकुल है। वहीं जो लता के अंदर पल रही है। आकर शीशे से झांकती है .ष्ष्तुम सो रही होघ् मैं भी सोना चाहती हूंए तुम्हारी गोद में रिमी की तरह। नहीं! मैं नहीं भर सकती अपने अंक में दो.दो लड़कियां। दो लड़कियों के भार से मेरी बांहें दुखती हैं। लता नींद में बड़बड़ाई।
.लेकिन मैं तो बहुत हल्की हूं। फूल.पत्तों सीए रुई के फाहों सीए चिडिय़ों के पंख सी।
.नहीं.नहीं मेरा रोम.रोम कांपता हैए नस.नस फटती हैए दो लड़कियों के स्पर्श से।
. छी! कितनी कमजोर हैं तुम्हारी नसें। नोंच डालूं तुम्हारे रोम.रोमघ् बोलो न! नोच दूं। तुम्हारा सारे रोमघ् और वह हंस पड़ी। डरावनी हंसी में हंस पड़ी। लता हड़बड़ाकर उठ बैठी। देखा सोती हुई रिमी के चेहरे पर हल्की मुस्कान बिखरी थी। लता देर तक सिर पकडक़र बैठी रही। रिमी को निहारती। उसे रिमी की बगल में एक और रिमी नजर आई। घुटने तक की फ्रॉक मेंए मुस्कुराती हुई। दो ष्रिम्मियोंष् ने उसकी दोनों आंखों को ढंक लिया। दो रिम्मियां आंखों में किरकिरी सी चुभने लगीं। दो रिम्मियां आंखों से आंसू बन टपक पड़ीं। लता को कमजोर करने लगीं। अनुरोध करने लगीं। लता ने जाकर अपना मुंह धोया। दोनों आकृतियां आंसुओं के साथ नाली में बह गईं। चेहरे पर छाया शोक. संताप भी धुल गया। कमजोरी छट गई। प्रतिज्ञा दृढ़ हो गई. मैं नहीं जन्म दूंगी एक और लडक़ी।
पर वह एक और लडक़ी तो जैसे जन्म लेकर मानेगी। दुनिया में आकर रहेगी। खुद को जन्म देने के लिए अपनी मां से क्या.क्या जतन नहीं करती। लडऩाए रोनाए गुस्साना और कभी.कभी तो मान.मन्नौवल भी। पिछले दिन ही जब लता बरामदे में बैठी सब्जियां काट रही थी। वह आकर लता के गले में बांहें डाल झूल गई. मम्मा! प्यारी मम्मा! देखो कितने रंग लाई हूं। मैं और उसने अपनी मुठठी में भरे ढेर सारे रंग कमरे में बिखेर दिए। चमकीले रंग। उन रंगों में लता झिलमिला उठी। उन रंगों से सारा माहौल खुशनुमा हो गया। लता खुश हो गई। मम्मा! मुझे. आने दो इस घर में फिर देखना कौन.कौन से रंग लाती हूं। इन्द्र धुनष के सारे रंग। सब बंद हैं मेरी मुटठी में। इन्द्रधनुषी रंगों की चाहत लता के अंदर उमड़ उठी। हिलोरें लेने लगी। लता उन रंगों में डूबने.उतराने लगी। इस डूब से धीरे.धीरे उसकी सांसें घुटने लगी। वह सचमुच डूबने लगी. नहीं! मुझे नहीं चाहिए तुम्हारे रंग३ लता चिल्लाई और पलक झपकते ही वह शैतान अपने रंगों के साथ ओझल हो गई। लाल रंग को छोडक़र। लाल रंग में लता को डूबोकर। सब्जी काटते हुए लता की अंगुली कट गई थी। उससे लाल रंग टपक रहा था।
उफ्! यह क्या होता जा रहा है मुझे। हरपल वह लडक़ी मेरे इर्द.गिर्द छाई रहती है। लता बिलबिला उठी इस क्रंदन में सुबह का सपना छिपा था। जब लता की आंखें एक छोटे बच्चे का सपना बुन रही थीं। सपने में एक छोटा सा.बच्चा अपने हाथ में नन्हा दीपक लिए खड़ा था। दिया टिमटिमा रहा था। उस दिये की रौशनी से लता का सारा जीवन प्रकाशमान हो रहा था। लता भाव.विभोर मंत्रमुग्ध हो उस छोटे लडक़े को निहार रही थी। तभी यह लडक़ी फिर वहां आ गई। उस लडक़े को धक्का मारकर गिरा दिया और खुद उसके हाथों का दिया लेकर खड़ी हो गई। धीरे.धीरे दीपक मशाल मे बदल गया। दिन चढ़ आया था आंखे खुली तो लता का सारा शरीर आग की गर्मी सा तप रहा था।
लता का मन अब कहीं नहीं लगता। हरदम खोयी.खोयी रहती है। बार.बार वह नन्हा दुध मुंहा चेहरा आंखों में उतर आता। अनुरोध करता. बचा लो न मुझे। कभी धमकता तुम मुझे नहीं मार सकती। लेकिन लता दृढ़ प्रतिज्ञ है। कठोर हो गई है। उसकी ममता सुख गई है। वह लड़की उसके पेट में लगातार लातें मारती है। उसके पैरों मे कीलें ठुकीं है।
अबॉशर्न में अभी दो दिन बाकी हैं। कल सुबह लता को डॉक्टर के पास जाना है। बस दो दिन की बात है। लेकिन ये दो दिन! ये दो दिन जाने कब बीतेंगे। पिछले पांच दिन भी पांच महीनों से बीते। और ये दो दिन लंबे.लंबे दो दिन स्वतंत्रत होने के दो दिन। मुक्ति पाने के दो दिन। दो दिन शेष हैं। इस लडक़ी से छुटकारा पाने को फिर शांति३शांति३शांति३ए दैहिक शांतिए मानसिक शांतिए लड़की के गर्भ से मुक्त होने की सांसारिक शांति।
इन दो दिनों में लता का शरीर पहले से भारी होता चला जा रहा है। यह भार मन मेंए आत्मा में दिमाग में नस.नस में भरता जा रहा है। कितनी भारी हो गई है यह लडक़ी गर्भ में३ इतना भार सह नहीं पा रही लता। उसके पैर. पिंडलियां सब दुखने लगेंगे३ सारी धरा का भार उसके अंदर है।
तुम मुझे नहीं मार सकती३ किसी तरह डॉक्टर तक पहुंची। सातवें दिन से एक दिन पहले ही किसी तरह अस्पताल पहुंच सकी भर कि वहीं रिशेप्सन के सामने धम्म से धरती पर बैठ गई। पसीने से तरबतर। चला नहीं जा रहा उससे। धरती के एक.एक सागर की हलचल उसे अंदर मरोड़ रही है।
दर्द बढ़ता जा रहा है। अचानक एक तेज दर्द उठा। समस्त जगत में शून्यता छा गई। आंखों के आगे अंधेरा छा गया।
तुम मुझे नहीं मार सकती की कई.कई कर्ण भेदी प्रतिध्वनियां एक साथ गूंज उठीं।
इस त्वरित गूंज के साथ ही कुछ उसे चीरता सा उसके शरीर के बाहर आ गयादृ मिस कैरेज! गर्भपात!!
लता को होश आया तो वह हॉस्पिटल के बिस्तर पर लेटी थी। हल्की होकर। डॉक्टर ने कहा कि अधिक तनावग्रस्तता के कारण उसका गर्भपात हो गया। लता हॉस्पीटल के ही कपड़े पहने थी। उसने देखा उसके कपड़े कमरे के एक कोने में पड़े हैं। इन्हीं कपड़ो में उसका गर्भपात हुआ। पसीने से खून में लथपथ कपड़े। गंदे कपड़े। छी!! घिनौने कपड़े। लेकिन उसने देखा उन कपड़ों में से कोई झांक रहा था। उसकी ओर आंखे तरेरता। उसे चिढ़ाता जीभ दिखाता. कहा था नए तुम मुझे नहीं मार सकती। मैं तो खुद ही बाहर आ गई। कहती हुई वह फिर से आकर लता से चिपक गई। उसकी बांहो में नहीं। गोद में नहीं। शरीर के उस हिस्से में जहां एक नन्हा सा दिल धडक़ता हैदृ बांयी तरफ।
;समीक्षा भारती न्यूज सर्विसद्ध





