चरित्र ही मानव की सुगन्धिः आचार्य स्वदेश

वेद मंदिर परिसर में वैदिक विधि विधान से यज्ञ हुआ सम्पन्न।

मथुरा। संसार में ईश्वर सबका नियता है। ईश्वर की व्यवस्था को जो तोडता है वह समझो पाखण्ड फैला रहा है। अगर हम यह मान लें कि ईश्वर सर्वशक्तिमान व सर्वदृष्टा है तो दुनिया में हम कोई गलत काम नहीं कर सकते हैं उक्त विचार गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आर्य समाज के वेद मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में गुरुकुल विश्विद्यालय के कुलाधिपति आचार्य स्वदेश ने व्यक्त किये। श्री आचार्य ने बताया कि आज ही के दिन गुरुवर विरजानन्द ने महर्षि दयानन्द को आदेश दिया था कि देश में फैले अन्धकार को मिटाकार फिर से देश को विश्व का सिरमौर बना दो। उन्होनें कहा चरित्र ही मानव की सुगन्धि है। जब हमारा चरित्र अच्छा होगा तो हम सत्याचरण करेगें। सत्याचरण रुपी धर्म को को अपनाकर अपने जीवन को देश धर्म को समर्पित करें तभी देश बचेगा। इससे पहले वेद मंदिर परिसर में वैदिक विधि विधान से यज्ञ सम्पन्न हुया, जिसमें हजारों श्रद्वालुओं ने आहूतियां दी। तथा वहां उपस्थित श्रद्वालुओं के लिए विशाल भण्डारे का आयोजन हुआ। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष अनूप चैधरी, गुरुकुल विश्वविद्यालय के प्राचार्य आचार्य हरीप्रकाश, सत्यप्रिय आर्य प्रधान, भगत सिंह वर्मा, आचार्य शत्रुजित शास्त्री, आनन्द स्वरुप केला, प्रेम सिंह जादौन, विपिन बिहारी, विवेक प्रिय आर्य, रमेशचन्द्र आर्य, सत्यप्रकाश अग्रवाल, कृष्णगोपाल गुप्ता, कपिल प्रताप सिंह, आचार्य नरेन्द्र, विकास ओम आर्य, हरी सिंह आर्य, महाशय अमीचन्द, देवी सिंह आर्य, कमलदेव आर्य, वीना आर्य, सरोज रानी आर्य, पुष्पा देवी आर्य, सत्यवती देवी, राजबाला देवी सहित हजारों श्रद्वालु उपस्थित रहे।


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