
मथुरा में ब्रज भाषा की शिक्षा के प्रवन्ध हों . डाण् जगदीश्वर चतुर्वेदी
मथुरा ण् जनपद के सांस्कृतिक कर्मियों ने ब्रज भाषा की शिक्षा की मांग की है । उन्होंने कहा है कि स्कूल. कालेजों में ब्रज भाषा को एक विषय के रूप में पढ़ाये जाने से न केवल विलुप्त होती भाषा को बचाया जा सकेगा वरन ब्रज संस्कृति के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
जानकारी के मुताबिक श्श् ब्रज संस्कृति और हमारा दायित्व श्श् विषय पर श्श्जन सांस्कृतिक मंच श्श् द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में बोलते हुए प्रोण् जगदीश्वर चतुर्वेदी ने कहा कि आश्यर्य की बात यह है कि साहित्यकारों ने खड़ी बोली को विकसित करने के नाम पर हिंदी साहित्य को समृध्द बनाने वाली ब्रज भाषा को ही पीछे धकेल दिया। मथुरा से २२ कि मी दूर गोवर्धन में ७३ साल धूनी रमाने वाले महा कवि सूरदास ने ब्रज भाषा में एक लाख पदों की रचना कर कृष्ण भक्ति और ब्रज भाषा को घर घर पहुँचाया ण् ब्रज भाषा हिंदी साहित्य की निधि बनी । आज हिंदी प्रेमी ही इस भाषा को इतिहास बनने से रोक सकते हैं।
प्रोण् चतुर्वेदी ने भाषा संरक्षण के लिए सुझाव देते कहा कि ब्रजवासी अपनी संस्कृति और भाषा की रक्षा के लिए अपने आसपास एक सांस्कृतिक आंदोलन छेड़ें ए ब्रजसंस्कृति की दुहाई देकर सांसद और विधायक बनने वाले जनप्रतिनिधियों पर दबाब बनाकर आगरा विवि में इस भाषा को एक विषय के रूप में सम्मलित कराएं । यदि ऐसा हुआ तो ब्रज संस्कृतिए भाषा और ब्रज की ऐतहासिक विरासत के प्रचार.प्रसार में भी मदद मिलेगी। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा । श् भारतकोश श् के संचालक आदित्य चौधरी ने कहा मथुरा के सांस्कृतिक कर्मियों को मुक्ताकाशीय रंगमंच का उपयोग ब्रज संस्कृति के प्रचार .प्रसार में किया जाना चाहिए गोष्ठी की अध्यक्षता करते मथुरा.वृन्दावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नगेंद्र प्रताप ने ब्रज के रंगकर्मियों और कवियों को सम्मानित करने का सुझाव दिया । गोष्ठी सञ्चालन डाण् राजकुमार चतुर्वेदी औरधन्यवाद ज्ञापन मुरारी लाल अग्रवाल ने कियाण्






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