पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से चांद पर पहुंचने के बाद पूछा था कि.. वहां(चांद) से अपना देश कैसा लग रहा है?... तो राकेश ने कहा था 'सारे जहा से अच्छा हिंदुस्तान हमारा', उसी तर्ज पर हमने वाराणसी की जनता से पूछा कि.... 2014 का लोकसभा चुनाव कैसा लग रहा है?.....तो वाराणसी की जनता ने कहा कि 'देश का पीएम होगा वैसा काशी चाहेगी जैसा'। वाराणसी के चुनावी रण को देखने के बाद देश का हर नागरिक यही पूछ रहा है कि आखिरकार राजनीति के सभी दिग्गज बाबा भोले की शरण लेने के लिए आतुर क्यों हो गए है। अड़भंगो की नगरी काशी पुरी तरह से चुनावी रंग में रंग चुकी है, चाहे वो किसी भी जाति या समुदाय का व्यक्ति हो सबके जुबान पर बस यही है "हर हर काशी घर घर काशी"। भले ही राजनीतिक पार्टियां कोई भी नारा दें, कितना भी ताकत झोंक दें फिर भी वो काशी की तह तक नहीं पहुंच सकती।
बीजेपी, कांग्रेस, आप, सपा, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार भले ही एक दूसरे से आगे रहने की होड़ में हो...लेकिन उन दिग्गज नेताओं को ये जानकारी नहीं है कि काशी की जनता मस्तमौला होने के साथ-साथ बहुत ही विश्वसनीयता के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी। नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल, अजय राय, कैलाश चौरसिया को शायद काशी के बासिंदे को समझने और तह तक पहुंचने के लिए काशी की जमीन से जुड़ना होगा।
84 घाट, अवघड़, साधु, सात नदी, शिक्षा की राजधानी, हस्तशिल्प, मंदिरों और बाबा भोले की नगरी है काशी। यहां की हर गली और चौराहा अपने आप में किसी खास नाम से जाना जाता है। पूरे देश में सबसे ज्यादा पर्यटकों के लिए लोकप्रिय नगरी है वाराणसी। रामनगर का किला और चुनार का किला यहां की इतिहास को दर्शाता ही नहीं बल्कि काशी को जीवंत करता है। घाटों की बात की जाए तो अस्सी घाट से लेकर रामकृष्ण फाउंडेशन तक के घाट मानो मां गंगा के पांव को पखेरता रहता हो। यहां के एक-एक घाट का इतिहास अपने आप में एक मिशाल है। शाम के समय दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती के समय मंदिरों में घंटो की टन टनाहट एक अलग ही मनोरम दृश्य को दर्शाता है, जो मन को भावविभोर कर देता है। दुर-दुर से आए श्रद्धालुओं को ऐसा दृश्य शायद ही और कहीं देखने को मिलता हो।
खाने पीने की बात की जाए तो ये शहर बनारसी पान, भांग-ठंडई, कचौड़ी-जलेबी, लस्सी, रबड़ी-मलाई, मलईयो, लवंगलाता-दूध के लिए विश्व प्रसिद्ध है काशी। यहां की सुबह के साथ ही हर एक व्यक्ति इन सभी व्यंजनों का मज़ा लेने से चूकना नहीं चाहता। पान के लिए लंका चौराहा, रामनगर की लस्सी, पहलवान का लवंगलाता, कचौड़ी गली की कचौड़ी, गोदौलिया चौराहे का भांग-ठंडई, खोआ गली का रबड़ी-मलाई और मलईयो के लिए विख्यात है।
बनारस ने देश को एक ऐसा प्रधानमंत्री को दिया जो लाल बहादुर शास्त्री नाम से जाने जाते है। जो भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री थे। जवाहरलाल नेहरू के उनके प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान 27 मई, 1964 को देहावसान हो जाने के बाद साफ सुथरी छवि के कारण उन्हे 1964 में देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। उन्होंने 9 जून 1964 को भारत के प्रधानमंत्री का पद भार ग्रहण किया। अब देखना ये है कि क्या काशी की जनता इतिहास को दोहराते हुए देश को अगला प्रधानमंत्री देगी।
लेखक
सुनील कुमार शर्मा





