देश के कौने-कौने से आए टी.जी. एवं किन्नर समुदाए के प्रतिनिधि -

ब्रज में भोजपुरी किन्नरों ने अधिवेशन में लिया बड़चड़ के भाग - 

बिहार से सबसे अधिक दिखे किन्नर - 

 

मथुरा। सदियों से समाज, प्रशासन और सरकार की नजर में हिकारत की नजर से देखे जा रहे किन्नर समुदाय के लोगों में भी अपने अधिकार को लेकर जागरूकता का जजबा जागा है अपने अधिकारों और मूलधारा से जुड़ने के लिए अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। देश में लगभग दस करोड़ टी.जी. किन्नर समुदाय है जो पुराने समय की तरह मात्र नाचगाना या शादी विवाहों आदि जैसे शुभकार्यों में बधाई देने तक ही सीमित नहीं है, अब किन्नर देश के विधायक पालिकाध्यक्ष, नगरपालिका मैम्बर तक बनने लगे हैं और प्रशासन चलाने की प्रभावी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं, एक लम्बी लड़ाई के बाद तिसरे जेन्डर की मान्यता मिल सकी है। परन्तु अभी पूर्ण अधिकार की लड़ाई बाकी है। सामाजिक चर्चित संस्था जागृति फाउण्डेशन द्वारा किन्नर, हिजड़ों और एम.एस.एमों पर उनके अधिकारों, कर्तव्यों एवं स्वास्थ्य पर एक लम्बे समय से महत्वपूर्ण कार्य कर रही है, इनके अधिकारों को लेकर समाज और सरकार से एक अर्से से संघर्ष जारी है।  किन्नर समुदाय को हाईकोर्ट ने पुरुष-स्त्री के अलावा सभी सरकारी दस्तावेजों में तीसरा कालम टी.जी.यों. के लिए मान्यता दे दी है परन्तु मान्यता प्राप्त होने के बाद भी इनके साथ भेदभाव गैर सरकारी स्थानों के अलावा सरकारी महकमों में भी भेद किया जाता है जिससे देश के नागरिक करोड़ों की संख्या में किन्नरों का शोषण होता है और अपमानित होना पड़ता है ऐसी आधी अधुरी आजादी का क्या मतलब?  इस विषय को लेकर जागृति फाउण्डेशन ने प्रख्यात समाज सेविका श्रीमती डाॅली जान के निर्देशन में किन्नरों का अधिवेशन 20-21 जुलाई को नगर के मध्य स्थित किसान भवन के सभागार में आयेाजित किया गया। अधिवेशन का उद्घाटन प्रख्यात रंगकर्मी रंगाचार्य पं. लोकेन्द्रनाथ कौशिक ने भगवान अद्धनारीश्वर के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। प्रस्तुत अधिवेशन में देश के कौने-कौने से किन्नर समुदाय के कार्यकर्ता सैकड़ों की तादाद में भाग लेने एक दिन पूर्व ही जमा होने लगे। सबसे अधिक जोश और जज्बंें के साथ बिहार के विभिन्न जनपदों से अधिवेशन में भाग लेने पधारे किन्नरों में देखा गया, गीत संगीत के साथ अधिवेशन का शुभारम्भ हुआ, विभिन्न वेषभूषा में किन्नरे सजे-धजे महफिल के आनन्द के साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति सचेत देखे गए, फाउण्डेशन के पी.ओ. सौरभ कौशिक के अनुसार पूरे देश में इसी प्रकार आधा अधिकार यात्रा और अधिवेशनों का दौर जब तक चलेगा जब तक किन्नरों को देश की मूलधारा से नहीं जोड़ा जाता है तथा उनके अधिकारों से उन्हें वंचित रखा जाए। इस अवसर पर बिहार से आयी सामाजिक संस्था दोस्ताना सफर व नगर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से भी अधिवेशन में पधारे किन्नरों का सम्मान स्वागत अभिनन्दन किया गया। चर्चित गीतकार डाॅ. नटवरनागर ने किन्नरों की पौराणिकता, प्रमाणिकता और महत्ता पर मलाहार प्रस्तुत की प्रख्यात रंगकर्मी रंगाचार्य कौशिक ने अपने उद्बोधन में किन्नरों के शोषण, उत्पीड़न और हिकारत भरे जीवन से लेकर अब उनके अच्छे दिन आने के वातावरण को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर किन्नरों के संघर्ष भरी जीवन यात्रा पर विचार व्यक्त दूरदर्शन मथुरा के पूर्व प्रभारी अधिकारी आर.के.त्रिपाठी ने किए, चर्चित समाज सेवी याकूँब खाॅ, चन्द्रशेखर शर्मा, रसिक बिहारी शर्मा, भगवान सिंह, विजय भारद्वाज, सुनील तरकर, मुनब्बर खाॅ, चन्द्रमुखी सखी, प्रियादासी, मथुरा के ख्याली किन्नरे, मुन्ना किन्नर, मैम्बर हासिया किन्नर, रेशमा किन्नर, काजल किन्नर, साधना किन्नर के साथ-साथ भारी मात्रा में मीडिया भी उपस्थित था।

 


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