
मथुरा। ब्रज की पहचान ब्रज की कला संस्कृति के उन अनर्वत श्रोतों से बह रही मंदाकिनी के द्वारा दुनिया भर में होती है जिसमें समाया है ब्रज रस श्रीकृष्ण के वात्सल्य माधुरी का दर्शन ब्रज सदैव से लोक रंजनी लोक कलाओं का केन्द्र बिन्दु रहा है समृद्धशाली ब्रज की इन लोक कलाओं से ब्रज के लाखों कलाकार, व्यापारी, पण्डा और सामान्य जीवन जीने वाला व्यक्तत्व इन्हीं लोक कलाओं से परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है और अपना इन्हीं लोक कलाआंे के माध्यम से जीवन-यापन कर रहा है जिनमें रासलीला, रामलीला स्वांग और रसिया की प्रस्तुतियां देश-विदेशों में भी समय-समय पर धूम मचाती रहती है। परन्तु राष्ट्र को दिशा और दशा देनेे वाला आधुनिक रंगमंच दो दशकों से उपेक्षा का शिकार पड़ा सिसक रहा है नाटक समाज का दर्शण होता है समाज को निर्देशित करता है, सत्तर से नब्बे के दशक में ब्रज मण्डल नाट्य संस्थाओं से भलीभांति फलता-फूलता था। सौकिया रंगकर्मीयों द्वारा अनेकों नाट्य संस्था, कलाभारती, स्वास्तिक, भारतीय नाट्य संघ, जागृति कला संगम, ब्रज जागृति रंगमण्डल, लोक कला भवन, रंगद्वार, अनामिका, रंगयात्रा व रंगद्वार जैसी चच्रित संस्थाऐं आए दिन ब्रज के सभ्य नागरिकों के समक्ष अपनी-अपनी प्रस्तुतियों देते रहते थे। वेगम का तकिया, रंगमहल, गाँधी जी की बकरी, कफन, तीन इक्के, दिल्ली तेरी बात निराली, दिल्ली ऊँचा सुनती है, पाप रे बाप, कसाई वाड़ा, नयाघर जैसे नाटकों की प्रस्तुतियों का केन्द्र था, परन्तु दो दशक से ब्रज के आधुनिक रंगमंच में मरुस्थल जैसा सूनापन व्याप्त हो चुका है। नवयुवकों में रंगमंच के प्रति किसी तरह का कोई लगाव न होना इसका मुख्य कारण है उक्त विचार ब्रज जागृति रंगमंण्डल ने ब्रज को पुनः रंगमंच की उत्तम प्रस्तुतियों का केन्द्र बिन्दु बनाने का वीड़ा उठाया है। इसी श्रृंखला में आज ब्रज जागृति रंगमंण्डल द्वारा नाट्य प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन अनेकों पुरुषकार प्राप्त प्रख्यात रंगकर्मी रंगाचार्य पं. लोकेन्द्रनाथ कौशिक ने भगवान नटराज के श्री विगृह के समक्ष पुष्पहार पहनाकर दीप प्रज्ज्वलित कर, विधिवत उद्घाटन वेद मंत्रों की रिचाओं की सस्वर स्वर लहरी के साथ हुआ, कार्यशाला का उद्घाटन श्री गोवर्धननाथ जी का मंदिर, छत्ता बाजार के भव्य प्रागंण में प्रातः बेला में हुआ। उद्घाटन के शुभ अवसर पर अनैकों प्रशिक्षणार्थीयों के साथ नगर के बुद्धजीवी समाज सेवी कलाकार उपस्थित थे। श्री कौशिक ने अपने उद्घाटन उद्घोषण में व्यक्त किए ब्रज जागृति रंगमण्डल द्वारा विगत वर्षों से ब्रज के कलाकारों और आधुनिक रंगमंच पर महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्य किए जाने पर बधाई दी तथा आशा व्यक्त की कि ब्रज के रंग जगत में रंगमंचीय सेवा की साधना में रंगमण्डल बराबर लगा रहेगा। ब्रज में स्वस्थ मनोरंजन के लिए अच्छे नाट्य प्रस्तुतियों का बराबर मंचन होता रहेगा, इस अवसर पर युवा नाट्य निर्देशक सौरभ कौशिक ने बताया कि नाट्य शिविर में अभिनय की वारिकियों, व्यक्तत्व विकास, लेखन, माईम, हविंग, बोडी लाँवेज रंगमंचीय व्यायाम के साथ-साथ एक्टिंग, आवाज, मंच मूमेन्ट पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जावेगी। पूर्व दूरदर्शन प्रभारी आर.के. त्रिपाठी ने दूरदर्शन और आकाशवाणी के रंगकर्म की विधिवत प्रशिक्षण देने की योजना के बारे में जानकारी दी, रंगमंच में काव्य और गीत का महत्व पर जानकारी प्रख्यात गीतकार डाॅ. नटवर नागर ने दी। तीन दर्जन प्रशिक्षणार्थीयों ने अब तक रंगकर्म प्रशिक्षण हेतु अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया है। इस अवसर पर गौरव शर्मा, सौरभ चैधरी, सुगन्धा देवी, भावना, मनीष शर्मा, विनोद वर्मा, पंकज अग्रवाल, वेदांत कौशिक, सौरव शर्मा, शिवांग भट्ट, दीपक शर्मा, श्रेयस चतुर्वेदी, आशीष शर्मा, मनोज गुप्ता आदि ने भाग लिया।






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