भारी मशक्कत के बावजूद दौसेरस में खली हाथ रही एसएसपी की टीम भैंसों के तबेले को चैक करती हुई
गोवर्धन। विगत दिनों दौसेरस में हुई गैंगवार के बाद आज एसएसपी ने तिहरे हत्या काण्ड के आरोपियों की धरपकड़ के लिये व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर गांव के हर कोने की बारीकी से तलाशी ली लेकिन इसके बावजूद पुलिस खाली हाथ ही रही। पुलिस को मिले तो सिर्फ कुछ संदिग्ध चोरी के ट्रैक्टर और कुछ बाइकें।
जनपद ही बल्कि आस पास के क्षेत्र में यह गांव टटलू गिरोह की नकली सोने की ईंटों और अवैध हथियारों की बड़ी मण्डी के रूप में अपनी विशेष पहचान रखता है। इसके साथ वाहन चोरी व जनपद भर में अन्य अनेकों बड़ी आपराधिक वारदातों में भी इस गांव का नाम शुमार रहता हैै। बताया जाता है कि पुलिस कभी भी इस गांव में दबिश नहीं दे सकी है। छोटी से भी छोटी किसी दबिश के लिये भी पुलिस को पहले पीएसी का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन इसके बावजूद पुलिस को गांव में कभी भी सफलता नहीं मिल सकी हैै। वहीं पुलिस के ऐसे हर एक अभियान को थाने से निकल कर दौसेरस गांव तक पहुंचते पहुंचते ही थाने में मौजूद उन्ही बदमाशों के मुखबिरों द्वारा सूचनाओं का आदान प्रदान कर धराशाही कर दिया जाता है।
आज एसएसपी मंजिल सैनी दहल के नेतृत्व में यहां एक कम्पनी पीएसी करीब आधा दर्जन थानों के पुलिस बल, दो पुलिस उपाधीक्षकों एवं महिला पुलिस उपधीक्षक व कुछ मुखबिरों सहित पूरी तैयारियों के साथ चलाया गया चैंकिंग अभियान गांव पहुंचने से पहले ही निरर्थक हो गया।
सूत्र बताते है कि ऐसे अभियान के थाने से चलने से पहले ही दौसेरस में बदमाशों के मुखबिरों ने उन्हें सूचना प्रसारित कर दी थी। वहीं बरसाना रोड से दौसेरस रोड पर अपनी फील्डिंग तैयार कर आगे बढ़ने में पुलिस को लगे घण्टों का समय दौसेरस के अपराधियों को वरदान साबित हुआ। वहीं गांव के बाहर पहुंचकर रणनीति बनाने की चाह में घण्टों खड़ी रही पुलिस भी गांव के अपराधियों को पहले अपने आने की सूचना और उन्हें पूरा समय देने के बाद ही आगे बढ़ी। इसी परिणिती रही कि पुलिस को पूरे गांव की बारीक छानबीन में न तो कोई हत्याकाण्ड का कोई अपराधी मिला न ही कोई वारण्टी या वांछित अपराधी पकड़ में आ सका। वहीं पुलिस ने अपनी नाकामी को छिपाने की गरज से अपराधियों का हर घर हर ठिकाना तलाशा लेकिन उन्हें को आपत्तिजनक या आपराधिक वस्तु भी नहीं मिल सकी।
अन्त में इतने ब़डे अभियान के बावजूद मिली निराशा से थक हार कर अपनी खीज छिपाने की गरज से पुलिस ने संदिग्ध मानकर करीब दो दर्जन बाइकों और करीब आधा ट्रैक्टरों को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उन्हें थाने लाकर खड़ा कर दिया। गांव के कुछ लोगों का भारी संख्या मंे तैनात पुलिस बल के चलते नाम न छापने की शर्त पर दबी जुबान से कहना है कि पुलिस द्वारा पकड़े गये लगभग सभी वाहन पूरी तरह वैध है लगभग सभी गाडि़यों के कागजात लोगों के पास मौजूद है वे पुलिस को अपने वाहनों के कागजात दिखाते ही रह गये औैर पुलिस जबरन उनके कागजात देखे बिना उनके वाहनों को पकड़ ले गये है। लोगों को ये भी कहना है कि हालांकि पुलिस ने कागज दिखा कर थाने से ही अपने वाहन ले जाने का आश्वासन उन्हें दिया हैै।
अब सवाल उठता है कि पहले तो पुलिस इस गांव में दबिश ही दे पाने में अक्षम और बौनी साबित रहती है और यदि दबिश देती है तो वो भी इतने बड़े स्तर पर न चाह कर दबिश से पूर्व ही पुलिस की इतनी भारी संख्या देखकर समूचे क्षेत्र में उसका शोर हो जाता है। थाने से करीब आधा दर्जन किमी से अधिक दूरी पर मौजूद इस गांव के शातिर अपराधियों के लिये ये 6 किमी की दूरी का समय ही उनके अपराधों को छिपाने और उन्हें भाग जाने के लिये मुफीद साबित होते हैै। वही गांव से नजदीक ही लगी राजस्थान सीमा भी उन अपराधियों के लिये सौगात बनी हुई है।






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