आगरा : केंद्रीय हिंदी संस्थान के पत्रकारिता एवं जन संचार के छात्र-छात्राओं द्वारा १०० महिलाओं से किए गए साक्षात्कार के आधार पर निष्कर्ष यह निकला है कि टेलीविज़न सीरियल में दिखाए जा रहे महिला पात्र यथार्थ ज़िंदगी से कोसों दूर हैं, और वास्तविकता से उनका कोई रिश्ता नहीं है।

Related Items
स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित करता भारतीय आयुर्वेद
कितना भारतीय है आज का ‘एवरेज इंडियन’?
भारतीय 'पहचान' का नया गणित : पासपोर्ट का मतलब 'नागरिकता' नहीं...!