
लुइस एल हे
अपनी मानसिक ऊर्जा को पुराने विचारों को छोड़ने और नए विचारों को अपनाने में लगाना चाहिए। कहें, 'मैं आयोग्य होने की आवश्यकता को छोड़ने के लिए तैयार हूं। मैं जीवन में सर्वोत्तम प्राप्त करने के लिए हकदार हूं, और अब मैं इसे स्वीकार करने के लिए प्यार से अपने आपको अनुमति देता हूं।'
'जब मैं कुछ दिनों तक बार-बार यह शपथ लूंगा तो टाल-मटोल का मेरा बाहरी प्रभाव स्वत: कम होना शुरू हो जाएगा।'
'जब मैं अपने भीतर आत्म-योग्यता का तरीका उत्पन्न कर लूंगा तो मुझे अपने भाग्य को टालने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।'
क्या आप देख रहे हैं कि यह किस प्रकार आपके जीवन के कुछ नकारात्मक विचारों या बाहरी प्रभावों पर लागू हो सकता है? चलिए, अपना समय और ऊर्जा स्वयं को ऐसे कार्यो के लिए कोसने में व्यर्थ करना बंद करें, जिन्हें हम कुछ आंतरिक विचारों के कारण नहीं छोड़ सकते। उन विश्वास को बदलें।
चाहे आप ऐसा किसी भी प्रकार से करें या हम किसी भी विषय में बात कर रहे हों, हम केवल विचारों से जूझ रहे हैं और विचारों को बदला जा सकता है।
जब भी हम किसी स्थिति को बदलना चाहते हैं, हमें ऐसा कहने की आवश्यकता होती है।
'मैं अपने अंदर के उस दृष्टिकोण को छोड़ना चाहता हूं, जो मेरी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है।'
आप जब भी अपनी बीमारी या समस्या के बारे में सोचें तो बार-बार अपने आपसे यह बात कह सकते हैं। आप जिस पल यह कहते हैं, आप पीड़ित वर्ग से निकल जाते हैं। अब आप असहाय नहीं हैं, आप अपनी शक्ति को स्वीकार कर रहे हैं। आप कह रहे हैं, 'मैं यह समझ रहा हूं कि इस स्थिति को मैंने ही उत्पन्न किया है। अब मैं अपनी शक्ति वापस लेता हूं। मैं इस पुराने विचार को छोड़ना और उसे जाने देना चाहता हूं।'
आत्मनिंदा
मेरे पास एक ग्राहक है, जो अपने नकारात्मक विचारों को सहन न कर पाने पर ढेर सारा मक्खन और अपने सामने पड़ने वाली हर चीज खा लेती है। अगले दिन वह शरीर में भारीपन के लिए क्रोधित होती है। जब वह छोटी थी, वह डिनर टेबल पर घूम-घूमकर सबका छोड़ा हुआ भोजन खाती थी और मक्खन का पूरा स्टिक खा जाती थी।
उसके परिजन यह देखकर हंसते थे और उन्हें यह प्यारी लगती थी। उसे अपने परिवार से मिलने वाला यह लगभग इकलौता अनुमोदन था।
जब आप स्वयं को फटकारते हैं, जब आप अपने आपको निम्नस्तरीय देखते हैं, जब आप अपने आप को पीटते हैं तो आप किसके साथ इस प्रकार का व्यवहार कर रहे होते हैं?
हमने अपने लगभग सभी दृष्टिकोण, चाहे वह नकारात्मक हों या सकारात्मक, उस समय ही स्वीकार कर लिए थे, जब हम तीन वर्ष के थे। तब से हमारे अनुभव उसी पर आधारित रहे हैं जो हमने उस समय अपने और जीवन के बारे में स्वीकार और विश्वास किया था। जब हम बहुत छोटे थे तो हमारे साथ जिस प्रकार का व्यवहार था, हम आम तौर पर अपने साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं। आप जिस व्यक्ति को फटकार रहे हैं, वह आपके भीतर का तीन साल का बच्चा है।
यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं, जो डरने और आशंकित होने के लिए अपने आप से क्रोधित हो जाते हैं तो अपने आपको तीन वर्षीय एक बच्चे के रूप में देखें। यदि आपके सामने एक छोटा तीन साल का भयभीत बच्चा होता तो आप क्या करते? क्या आप उस पर क्रोधित होते या आप उसे अपनी बांहों में लेकर दिलासा देते, जब तक कि वह सुरक्षित और सहज नहीं महसूस करने लगता? जब आप छोटे थे तो आपके आसपास मौजूद वयस्कों को यह नहीं मालूम रहा होगा कि उस समय आपको कैसे दिलासा देना है। अब अपने जीवन को आप वयस्क हैं और यदि आप अपने अंदर के बच्चे को दिलासा नहीं दे रहे हैं तो यह वास्तव में बहुत दु:खद है।
अतीत में जो हुआ, वह हो चुका है और अब वह समाप्त हो चुका है। लेकिन यह वर्तमान है और अब आपके पास अपने आपसे ऐसा व्यवहार करने का अवसर है। जैसा व्यवहार आप चाहते थे। एक डरे हुए बच्चे को दिलासा देने की जरूरत होती है, न कि डांटने की। अपने आपको डांटना आपको और भयभीत करेगा और आप किसी की ओर नहीं मुड़ सकते। जब आपके अंदर का बच्चा असुरक्षित महसूस करता है तो बहुत बहुत-सी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। याद कीजिए कि जब आप छोटे थे तो नीचा दिखाए जाने पर आपको कैसा महसूस होता था? आपके अंदर के बच्चे को वैसा ही महसूस होता है।
अपने प्रति दयालु बनें। अपने आपको प्यार करना और स्वीकार करना शुरू करें। उस छोटे बच्चे को अपनी उच्चतम क्षमता में अपने आपको अभिव्यक्त करने के लिए इसी की आवश्यकता होती है।
(प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'यू कैन हील योर लाइफ' से साभार)





