मथुरा। राधाकुण्ड में अष्टसखी कुण्ड के नाम से निर्माण को लेकर अखबारों में आये दिन एक स्थानीय भूमाफिया द्वारा प्रशासन को गुमराह करने वाली खबरें छपवाकर प्रभावित किया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि आबादी क्षेत्र में निर्माण कार्य कराया जा रहा है। अष्टसखी कुण्ड से इस जमीन का कोई मतलब नहीं है। केवल निर्माणकर्ताओं से धन वसूलने का यह पुराना धंधा एक भूमाफिया का है जिसे राधाकुण्ड के लोग अच्छी तरह से जानते हैं। मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण, राजस्व टीम सभी ने इस संबंध में जांच आख्यायें दी हैं। उनके आधार पर भी स्पष्ट होता है कि निर्माण कार्य आबादी के खसरा नंबर 58 पर किया जा रहा है जबकि सफेदपोश नेता विवादित भाग को निर्माण में दिखा रहे हैं, जो पूर्णतः गलत है, विवादित भाग में कोई निर्माण नहीं हो रहा है। जिस निर्माण के बारे में शिकायत की गयी है वह निर्माण माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल सर्वे व नक्शा से बाहर है।
अष्टसखी कुण्ड जैसा विवाद किसी भी न्यायालय में नहीं चल रहा है। सिर्फ एक तालाब से संबंधित विवाद है जोकि खसरा नंबर 30, 20, 41 का है। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने गत 13 मई को जिलाधिकारी को सभी तथ्यों का उल्लेख कर दिया गया। 30 मई को लेखपाल राधाकुण्ड की आख्या के आधार पर तथा राजस्व निरीक्षक गोवर्धन के आख्या के आधार पर निरस्त कर दिया जिससे चिढ़कर शिकायतकर्ता निर्माणकर्ताओं से द्वेष मानने लगे और शासन-प्रशासन और समाचारपत्रों को गुमराह कर पूरा प्रकरण अष्टसखी कुण्ड पर केन्द्रित कर दिया गया है ताकि ब्रजवासियों की भावनायें उद्वेलित हांे।
निर्माणकर्ता पर ही नहीं शिकायतकर्ता ने तो विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन पर भी आरोप लगाये हैं, जिससे उसकी मानसिकता का पता लगता है। आज इस संबंध में बाबा केशवदास निवासी राधाकुण्ड ने अवगत कराया है कि यह सब भूमाफिया का खेल है और वह प्रशासन और जनमानस को गुमराह कर रहा है।





