पुलिस-प्रशासन और राजनैतिक दलों के नेता रहे मौजूद

राजनेता मृतक दलित युवक के यहां परिवार को सांत्वना देते हुए 

गमगीन माहौल में मृत युवक की अंत्येष्टि

मथुरा। गोवर्धन थाने की पुलिस की लापरवाही के चलते बुधवार देरसायं एक दलित युवक की मौत के बाद उत्तेजित परिवार के लोग और ग्रामीणों द्वारा थाने पर किये गये पथराव और उपद्रव के बाद काफी मुश्किल से पुलिस ने मामले को जैसे-तैसे शांत किया। रात्रि को ही शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया। आज बृहस्पतिवार सुबह उस समय पुलिस, प्रशासन के हाथ-पैर खड़े हो गये जब अड़ींग के लोगों ने पंचायत कर निर्णय किया कि वे तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे जब तक पुलिस प्रशासन निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करने का आश्वासन नहीं देता। इसके बाद प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की मीटिंग हुयी और ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि वे किसी भी निर्दोष के खिलाफ कार्यवाही नहीं करेंगे। इसके उपरांत गमगीन माहौल में पुलिस-प्रशासन की भारी मौजूदगी और सपा नेताओं की उपस्थिति के मध्य मृतक युवक महेन्द्र के शव का अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस के बड़े अधिकारी अड़ींग कस्बे में गाडि़यां लेकर सड़क किनारे जमे रहे। परिवार के लोगों को जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि वे प्रदेश सरकार से सिफारिश करेंगे कि मृतक परिवार को ज्यादा से ज्यादा मुआवजा दिलाया जाये। कल कस्बे के अड़ींग में महेन्द्र नामक युवक की पुलिस थाना गोवर्धन में अभिरक्षा के दौरान हुयी पिटाई और मारपीट से युवक की मौत के मामले में बुधवार देरसायं गोवर्धन थाने पर पथराव के बाद हरकत में आयी पुलिस ने गोवर्धन और अड़ींग क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया है। पूरे अड़ींग कस्बे में मातम भरा सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानें तो खुली मिलीं लेकिन लोगों की आवक कम ही नजर आयी। पूरे गांव में शोक की लहर थी। हालांकि गोवर्धन थाने पर जरूर पुलिसकर्मियों में दहशत थी लेकिन पूरे गोवर्धन क्षेत्र में घटना के बाद सामान्य स्थिति देखी गयी। हमारे संवाददाता ने पाया कि थाने पर जरूर सन्नाटा था। अड़ींग में मृतक की अंत्येष्टि से पूर्व जरूर भारी पुलिस बल गाडि़यां लेकर सड़क किनारे खड़ा देखा गया। एसपी क्राइम, एसपी सिटी, एसपी ग्रामीण के अलावा सीओ सिटी और कई थानों की पुलिस मौजूद रही। 

 

दहशतभरा सन्नाटा

लोगों में दहशत थी कि पुलिस निर्दोष ग्रामीणों को फिर रिपोर्ट में शामिल कर उनका उत्पीड़न करेगी इसीलिये ग्रामीणों ने पंचायत की। बाद में पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही न करने के आश्वासन पर शव का अंतिम संस्कार किया गया। पूरे गांव में तरह-तरह की चर्चायें हैं। लोग अपने घरों से बाहर चले गये हैं। पुलिस कार्यवाही के भय से वे अपनी दुकानों पर भी नहीं बैठ रहे हैं। पूरे कस्बे में सन्नाटा पसरा हुआ है। 

पिटाई और करंट लगने से हुयी महेन्द्र की मौत

कल पुलिस अभिरक्षा में गोवर्धन थाने में हुयी युवक महेन्द्र की मौत ने पुलिस पर कई सवाल खड़े किये हैं। पिछले चार दिनों से महेन्द्र को थाने में बैठाये रखा था। परिवार वालों का आरोप था कि पुलिस ने उसकी जबरदस्त पिटाई की जबकि युवक ने कहा था कि वह काफी बीमार है और उसने चोरी नहीं की है लेकिन उस पर कोई रहम नहीं किया गया। चार दिन से लगातार उसका उत्पीड़न हो रहा था। मृतक के परिजन कहते हैं कि उसके हाथ, गर्दन और पैर में पुलिस ने करंट लगाया था जिससे उसकी दशा और बिगड़ गयी थी। वह पहले से ही रोगी था और इस उत्पीड़न से ही उसकी मौत हुयी है। वे इसके लिये थानाध्यक्ष और कई पुलिसकर्मियों को दोषी बता रहे थे जिन्हांेने अनुनय विनय और बीमारी की बात के बाद भी युवक पर दया नहीं की। वरना ऐसी घटना नहीं होती। पूरे अड़ींग कस्बे में पुलिस की कार्यवाही और दरिंदगी की जबरदस्त चर्चा थी। 

 

मृत परिवार को दिलायेंगे अधिक से अधिक मुआवजाः डीएम

जिलाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि हमने प्रदेश सरकार को अधिक से अधिक मुआवजा दिलाने के लिये निवेदन किया है। उन्होंने कहा कि इसमें पुलिस की लापरवाही सामने आयी है। इसी कारण थानाध्यक्ष को निलंबित किया गया है। जनता के साथ पुलिस-प्रशासन का कोई दुव्र्यवहार नहीं होगा। 

12 नामजद व 15० अज्ञात के खिलाफ लगी 7सी क्रमिनल लॉ एक्ट 

- पुलिस ने संगीन धाराओं में किया मामला दर्ज 

मथुरा। विगत रात्रि अड़ीग के युवक की पुलिस की लापरवाही में हुई मौत पर थाने का इस तरह घेराव होगा किसी ने सोचा नहीं होगा। पुलिस स्टेशन प्रभारी सूर्यभान सिंह यादव को पीटने के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस उपाधीक्षक सदर संजय कुमार को भीड़ ने घेर लिया। थाने में अन्य पुलिसकर्मियों को भी ईंट-पत्थरों के साथ नीचे पटक-पटक कर मारा। जब पुलिसकर्मी अपने वाहन के अंदर घुसे तो पुलिस के आधा दर्जन वाहनों को पत्थरों की चपेट में ले लिया। सीओ, एसओ की जीप तोड़ दी। घटना में थाने में तैनात गार्ड जगदीश, सुरेश चंद, कांस्टेबल श्रीकृष्ण, गार्ड बीरवाल, जितेन्द्र कुमार घायल हो गये। पुलिस ने इनका चिकित्सकीय परीक्षण इलाज के दौरान कराया है। करीब एक दर्जन पुलिसकर्मियों को छिटपुट छोटें आई हैं। एक पुलिसकर्मी का मोबाइल गिर गया। वाहनों की टूटफूट से नुकसान भी हो गया। पुलिस ने घटनाक्रम के दौरान कराई गई वीडियोग्राफी में चिन्हित कर असमाजिक तत्वों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पूरे मामले में थाना एसआई हरीशंकर वर्मा द्वारा अड़ीग के रहने वाले उपेन्द्र शर्मा उर्फ लाला पुत्र इन्द्रमणी, बिजेन्द्र पहलवान पुत्र यादराम कटारा, दुल्ली पहलवान, मुखिया उपाध्याय, नवरतन पचैरी, दिलीप शर्मा पुत्र नत्थो, बिजेन्द्र पुत्र जग्गो पंडित, महेश पुत्र गोविंद, मूलचंद पुत्र नाहर सिंह, हीरा व नन्नू के अलावा 1० से 15० अज्ञात में धारा एक राय को बलवा, सरकारी सम्म्पत्ति को तोडफोड़कर, जान से मारने का प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा व 7सी क्रमिनल लॉ एक्ट में मामला दर्ज कराया है। इन मुकदमों की विवेचना एसएसआई अवधेश तिवारी करेंगे।  

अड़ींग चैकी प्रभारी भी निलंबित

युवक की मौत के बाद एसओ गोवर्धन सूर्यभान सिंह को निलंबित किये जाने के बाद अड़ींग चैकी प्रभारी राजेश कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है। जनपद पुलिस द्वारा शासन को भेजे पत्र में इसकी जानकारी दी गयी है।

अधिकारियों के आश्वासन पर कैसे करें ऐतबार

अड़ींग के युवक की हुयी मौत और गोवर्धन थाने पर पथराव, थानाध्यक्ष और सीओ की पिटाई जैसी घटना के बाद अड़ींग कस्बे में सन्नाटा है। ग्रामीण पंचायत कर आपस में कहते सुने गये कि पुलिस पर हम कैसे भरोसा करंे? हमने पंचायत के बाद फैसला किया कि गांव के किसी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्यवाही नहीं करेगी तभी शव जलाया जायेगा लेकिन आश्वासन के बाद भी पुलिस गांववालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर रही है। पुलिस की यह दोहरी चाल ग्रामीणों की समझ में नहीं आ रही। जबकि जिलाधिकारी सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ग्रामीणों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही करने की मना कर रहे हैं। अगर पुलिस निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ कार्यवाही करेगी तो इससे माहौल खराब हो सकता है। पुलिस को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

 


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