'बलात्कार पीड़ित महिलाओं के साथ संवेदनशील हों अस्पताल'

नई दिल्ली : केन्द्रीय स्वास्थ्य और कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि बलात्कार पीड़ित और यौन अत्याचार पीड़ित महिलाओं को सहानुभूति से अधिक आदर की आवश्यकता होती है। समाज का यह दायित्व है कि वह पीड़ित महिला को न्याय दे और उसके पुर्नवास का काम करें ताकि वह प्रताड़ना की पीड़ा से उबर सके। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारतीय व्यवस्था में ऐसी महिलाओं की दयनीय स्थिति की शुरूआत थानों में या अस्पतालों में लापरवाही या संवेदनहीनता के कारण होती है।

डॉ. हर्षवर्धन भोपाल में जयप्रकाश अस्पताल भोपाल के तत्वावाधान में एकल खिड़की संकट केन्द्र (वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर- ओएससीसी) शुरू किए जाने के मौके पर संसदीय संगठनों के प्रतिनिधियों, स्वास्थ्यकर्मियों अधिकारियों तथा अन्य पेशेवर लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस एकल खिड़की संकट केन्द्र का उद्देश्य बलात्कार और यौनाचार पीड़ित महिलाओं को समर्थन, देखभाल, इलाज, सुरक्षा तथा कानून सलाह देना है। यह देश का पहला एकल खिड़की सेवा केन्द्र है और इसे मध्यप्रदेश सरकार के गौरवी महिला सम्मान एवं संरक्षण अभियान के हिस्से के रूप में शुरू किया गया है।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान तथा जानेमाने अभिनेता आमीर खान भी मौजूद थे।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से पीड़ितों के परिवारजनों से मिला हूँ और मैने संवेदनहीन प्रणाली का शिकार होते हुए उन्हें देखा है। उन्होंने कहा कि बलात्कार के कुछ घंटों के बाद ही पीड़ित को चिकित्सा और कानूनी सहायता देनी होती है लेकिन इस नियम को भी धड़ल्ले से तोड़ा जाता है। गरीब परिवार से आने के कारण पीड़ित और उसका परिवार इस हालत में नहीं होता कि वह मांग करे कि नियमों का पालन किया जाए। अनेक बार उन्हें ऐसे नियमों की जानकारी भी नहीं होती।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने घोषणा की कि वह सभी केन्द्रीय अस्पतालों तथा राज्य सरकारों को परामर्श देंगे कि वह अपने यहां एकल खिड़की संकट केन्द्र जैसे संस्थान स्थापित करें। डॉ. हर्षवर्धन ने भोपाल में सरकार और स्वयंसेवी संगठन के बीच सहयोग की सराहना की और कहा कि देश के बाकी हिस्सों खासकर राष्ट्रीय राजधानी के लिए एक मॉडल साबित होगा जहां पीड़ितों के साथ बर्ताव में सुधार की अधिक आवश्यकता है।

हर्षवर्धन ने घोषणा कि अस्पताल के अधिकारियों को बलात्कार और यौन अत्याचार पीड़ित लोगों की शारीरिक तथा मनोवैज्ञानिक जरूरतों से निपटने के बारे में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में नियम और परंपराएं है लेकिन उन्हें लागू नहीं किया जाता। नतीजा यह होता है कि दो अंगुलियों से जांचने के प्रतिबंधित व्यवहार की भी अनदेखी की जाती है। उन्होंने कहा कि दंडात्मक प्रावधान किए जाएंगे ताकि सामान्य नियमों की अनदेखी करने वाले अस्पताल कर्मियों को निलंबित किया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि नए नियम से पीड़ित को चिकित्सा और कानूनी साक्ष्य जुटाने में आसानी होगी। अगर पीड़ित को अस्पताल में दाखिल कराने की जरूरत पड़ी तो उसके लिए एक अलग कैबिन की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय सभी अस्पतालों के अधीक्षकों को विशेष कोष देगा ताकि वह चिकित्सा और कानूनी जरूरतों के आने पर खर्च कर सकें। इसमें पीड़ित के परिवारजनों के रहने और उनके आनेजाने का खर्च भी शामिल होगा। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि पीड़ित के परिवार से किसी राशि की वसूली नहीं की जाएगी।

इससे पहले डॉ. हर्षवर्धन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल को देखने गए उनके साथ स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा भी थे। एम्स भोपाल के निर्देशक डॉ. संदीप कुमार ने उन्हें परिसर दिखाया।

एम्स भोपाल भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी का सपना है और इसकी परिकल्पना उस समय की गई थी जब वाजपेयी मंत्रिमंडल में सुषमा स्वराज स्वास्थ्य मंत्री थीं।

अस्पताल में ओपीडी तथा अन्य विभाग काम कर रहे हैं और इनडोर सेवा में मरीजों की भर्ती शीघ्र होने लगेगी। मेडिकल कॉलेज शाखा में स्नातक के दो बैच चल रहे हैं।

डॉ हर्षवर्धन ने संस्थान के निर्देशक, इंजीनियरों तथा अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह छह महीने के अंदर बाकी बचे कार्य पूरा करें ताकि अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरी तरह तैयार एम्स भोपाल को राष्ट्र को समर्पित कर सकें।

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि महान प्रधानमंत्री की दृष्टि को साकार किया गया है। एम्स भोपाल के पास एम्स दिल्ली के स्तर से मुकाबला करने की प्राप्त क्षमता है और इससे जुड़े लोगों के समर्पण से यह कार्य पूरा होगा। एम्स भोपाल के पास आयुष सुविधा भी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नए एम्स के लिए 100 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने का फैसला किया गया है और निर्देशक से कहा गया है कि वह जमीन खरीदारी संबंधी बातचीत करें ताकि मानसिक रोग, जेरियाट्रिक्स मेडिसिन तथा नेत्र विज्ञान जैसे विभाग जोड़े जा सकें। मॉडल एम्स नई दिल्ली की तरह होना चाहिए जिसमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद नेत्र विज्ञान संस्थान परिसर में ही है।

स्वास्थ्य मंत्री कॉलेज में लड़के और लड़कियों के छात्रावास में गए और उनके साथ मेस में भोजन किया। 


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