
बाबा जयगुरूदेव के वार्षिक भण्डारा सत्संग मेले में प्रवचन सुनते भक्तगण एवं पाश्र्व में नाम योग साधना मन्दिर

नाम योग साधना मन्दिर पर आयोजि कार्यक्रम में प्रवचन करते राष्ट्रीय के0 के0 मिश्रा
मथुरा। जयगुरुदेव नाम योग साधना मन्दिर में चल रहे 6 दिवसीय बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के पावन वार्षिक भण्डारा सत्संग मेला के पहले दिन राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चन्द्र और डाॅ0 करुणा कान्त ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित किया। उपदेशक सतीश चन्द्र जी ने महापुरुषों के वचन का स्मरण कराते हुये कहा कि मौत निश्चित है। इसको याद करते रहना चाहिये। जो हिन्सा कर रहे हैं एक दिन यह हिंसा उन पर भी आयेगी, इससे कोई बच नहीं सकता। सब कुछ यहीं पर छूट जायेगा। मौत के समय अन्तरघाट पर गुरु महाराज मिलते हैं और आप एक से दो हो जाओगे। लेकिन जिनको गुरु नहीं मिले उनको यमराज कठोर से कठोर दण्ड देने के लिये नर्कों में डालते हैं। जीव को नर्क में जाने से गुरु बचा लेते हैं। महापुरुषों के दरबार में तन, धन और मन तीन प्रकार के सेवा कार्य मुख्य होते हैं। अपने शरीर की क्षमता के अनुसार सेवा कार्य खोज कर करते रहना चाहिये। सत्संग सुनना, पानी पिलाना, खाना खिलाना आदि तन की सेवा है। इन सेवाओं से शरीर के अंग पवित्र होते हैं। धन की सेवा से विविध प्रकार की शारीरिक और भौतिक परेशानियों में लाभ होता है। इस प्रकार जगत के मोटे बन्धन मोह, लोभ आदि इन सेवाओं से कमजोर हो जाते हैं। डाॅ0 करुणा कान्त जी ने सन्त महापुरुषों की महिमा का वर्णन करते हुये बताया कि जिन महापुरुषों का हम नाम लेते हैं उन्होंने लाखों जीवों को पार उतार दिये। गुरु नानक जी के शिष्य बाला और मरदाना के सामने एक सेठ के द्वारा पूछे गये तीन प्रश्न सत्संग, सेवा और दर्शन के क्या लाभ होते है? के दृष्टान्त को बताते हुये कहा कि सत्संग से ही व्यक्ति में सेवा भाव पैदा होता है। महापुरुषों की संगत सेवा से सब कुछ प्राप्त हो जाता है। सेवक के पैर के नीचे गुरु का हाथ होता है। बाबा जी कहा करते थे कि यदि सन्तों के आदेश में सेवा की जाती है तो मानव के अन्तःकरण मन, बुद्धि, चित्त आदि पवित्र हो जाते हैं। जिससे सुरत धीरे धीरे निर्मल हो जाती है और अपने मंजिल को प्राप्त कर लेती है। उन्होंने आगे कहा कि पावन भण्डारे में 19 मई को आस-पास के गाँवों के लाखों लोगों को भोजन प्रसाद कराये जाने की व्यवस्था है। जिससे देश के कोने-कोने से आये हुये लोगों को तन व धन की सेवा करने का अवसर प्राप्त करने के साथ सभी को गुरु महाराज की दया प्राप्त हो सकेगी। मेले में श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी है। अनेक जगहों पर शर्बत प्याऊ के पाण्डाल से शर्बत पिलाया जा रहा है। मन्दिर की सजावट लोगों के आकर्शण का केन्द्र बना है। मथुरा जंक्शन के दोनों तरफ से जयगुरुदेव आश्रम तक सिटी बस का संचालन किया जा रहा है।






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