
वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकास के साथ ऊर्जा और परिवहन की मांग बढ़ रही है। ब्रिक्स देशों का विकास हो रहा है और चीन तथा भारत आज अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को टिकाऊ बनाए रखने के लिए उच्चस्तरीय ईंधन का उपयोग कर रहे हैं।
भारत में कुल मिलाकर ऊर्जा की आवश्यकता वर्ष 2011-12 के 549 मिलियन टन तेल के समतुल्य से बढ़कर वर्ष 2031-32 तक 1433 मिलियन टन तेल के समतुल्य हो जाएगी जो 2.6 गुना वृद्धि होगी। परिवहन क्षेत्र में फिलहाल 86 मिलियन टन तेल के समतुल्य ऊर्जा की खपत होती है, जो ऊर्जा खपत का लगभग 16 प्रतिशत भाग है। वर्ष 2031-32 तक इसके 360 मिलियन टन तेल के समतुल्य तक बढ़ने की संभावना है और तब यह कुल ऊर्जा खपत का 25 प्रतिशत हो जायेगा। परिवहन क्षेत्र का विकास 4.2 गुना हो जाएगा। परिवहन क्षेत्र में वर्ष 2011-12 में 57 प्रतिशत तेल की खपत हुर्इ और वर्ष 2031-32 तक इसके 73 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। परिवहन के लिए लगभग 97 प्रतिशत ईंधन पेट्रोलियम पर आधारित है और शेष 03 प्रतिशत भाग में सीएनजी, बायो-ईंधन और बिजली का बराबर हिस्सा है। मौजूदा संकेतों के अनुसार यही समीकरण 2031-32 तक भी जारी रहने वाला है। यदि हम परिवहन क्षेत्र में खपत प्रणाली की ओर ध्यान दें तो सड़क पर चलने वाली सवारियां तेल के 93 प्रतिशत भाग की खपत करती हैं, रेलवे और हवाई सेवा में प्रत्येक में 3 प्रतिशत और जल मार्ग में शेष 1 प्रतिशत की खपत होती है।
इस संदर्भ में यातायात क्षेत्र के लिए 5 नवम्बर, 2014 को आयोजित जैव ईंधन 2014 सम्मेलन प्रासंगिक था। सम्मेलन का विषय 'भारत में जैव डीजल क्षेत्र में व्यावसायिक अवसर और विकास को बढ़ावा' देना था। इससे निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों से नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, परामर्शदाताओं, उद्यमियों, उपभोक्ताओं, विनिर्माताओं और विक्रेताओं को एक साझे मंच पर आपस में विचार-विमर्श का अवसर प्राप्त हुआ। उद्घाटन सत्र को माननीय रेलवे मंत्री, केन्द्रीय नौवहन सड़क यातायात, राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री और रेल राज्य मंत्री सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने संबोधित किया। उन्होंने तेल के आयात में कमी लाने और कार्बन उर्त्सजन कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में जैव ईंधन के महत्व पर जोर दिया।
भारतीय रेलवे ने आरडीएसओ में डीजल ईंधन के लिए 20 प्रतिशत जैव डीजल का पहले ही सफल प्रयोग कर लिया है। शकूर बस्ती, खड़कपुर, पैरंबुर जैसी बहुत सी इकाइयों में बी-5/बी-10 के साथ फील्ड परीक्षण कर लिए गए हैं। इन इकाइयों में प्रति दिन 2000 लीटर क्षमता वाले जैव डीजल उपयोग करने वाले लघु संयंत्र लगाए गए हैं। रेलवे ने रेल पटरियों के साथ-साथ जटरोफा पौधे भी लगाने का प्रयास किया था, जो ज्यादा सफल नहीं रहा।
सम्मेलन में यातायात, ईंधन सम्मिश्रण, संग्रहण और वितरण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विनिर्माताओं ने जैव डीजल संयंत्रों, कच्चे माल और उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी पहलुओं पर अपने विचार रखे।






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