बृज के परम्परागत रासलीला मंचन में ब्रज के कलाकारों ने मन मोहा

गोवर्धन के तीर्थ विकास भवन में श्रीरास लीला महोत्सव में मुदरी चोरी लीला का मंचन करते ब्रज के कलाकार

तीर्थ विकास भवन में रास लीला में भावविभोर दर्शक

गोवर्धन। आन्यौर परिक्रमा मार्ग स्थित तीर्थ विकास ट्रस्ट में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महोत्सव के अंतर्गत आयोजित रास लीला में ब्रज के कलाकारों ने मन मोह लिया। पारंपरिक ब्रज भाषा में वृंदावन के रासाचार्य पद्म विभूषित हरगोविंद स्वामी के निर्देशन में श्रीराधा कृष्ण व उनकी सखियों ने मुदड़ी (अंगूठी) चोरी लीला का मंचन किया। पारंपरिक लीला का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण व उनकी अल्हादिन शक्ति श्रीराधा के युगल झांकी के दर्शन के साथ हुआ। इसके बाद लीला मंचन में भगवान श्रीकृष्ण के रास में लीला विहार के दर्शन हुआ। लीला विहार दर्शन के दौरान ही राधा जी की अंगूठी गिर जाती है और कृष्ण इस अंगूठी को उठाकर छिपा लेते हैं। शाम को राधा जी घर पहुंचती हैं तो उनके अंगुली में अंगूठी न होने पर चिंता होती है और यह बात वह अपनी सखियों को बताती हैं। इस पर सभी सखियां एक स्वर से नटखट कन्हैया की चालाकी बताकर राधा जी के संग तलाशी लेने पहुंच जाती हैं। तलाशी में उनकी अंगूठी मिल जाती है। कृष्ण से बदला लेने के लिए एक दिन राधा जी कंदंब के वृक्ष के नीचे सोते भगवान के मोर पंख, मुकुट, वंशी को चुरा लेती हैं। भगवान ने जब जागकर देखा तो आश्चर्य हुआ और कहने लगे कि वे दुनिया की चोरी करते हैं आज उनकी चोरी हो गई। वे राधा जी के पास पहुंचे लेकिन मना कर दी। इस पर कृष्ण भगवान जनाना (सखी) भेष धारण कर राधा जी के पास पहुंचे और कहने लगे कि उनको भगवान श्रीकृष्ण से मिलना है। उन्होंने भाव से कहा कि राधे आज श्याम से मोय मिलादै...., इस पर राधारानी स्वयं कृष्ण का भेष धारण कर चोरी किये गये मुकुट, मोर पंख और वंशी धारण कर सखी के पास पहुंच जाती है। तुरंत कृष्ण अपने चोरी किये गये सामान को पकड़ लेते हैं। इस चोरी लीला में एक दूसरे के स्नेह व भाव को देख भक्त भावविभोर हो गये। इसके बाद सुंदर युगल स्वरूप की झांकी की आरती व्यास सोमदत्त दीक्षित एवं श्रीराधा कृष्ण सेवा समिति के सचिव पूरन चंद कौशिक ने उतारी। इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक श्रीराधा कृष्ण सेवा समिति के सचिव पूरन चंद कौशिक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण व दर्शन बड़े पुण्य कर्मों से प्राप्त होता है। श्रीकृष्ण की कथा व लीला और भगवान श्रीकृष्ण में किचिंत मात्र भी अंतर नहीं है। इनमें जो भेद की दृष्टि रखते हैं, वे पुण्य के भागी नहीं बन सकते हैं। बड़े सौभाग्य के साथ साक्षात् गिरिराज महाराज की तलहटी में बैठकर व्यास सोमदत्त दीक्षित महाराज की कथा श्रवण व रास के दर्शन का अवसर मिला है। कार्यक्रम में आयोजक देशबन्धु गुप्ता, विपिन गुप्ता, सत्यप्रकाश आदि ने प्रसाद वितरित किया।


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