उपनिवेशी शासन के विरुद्ध भारत का संघर्ष लम्बा और कठिन था। विदेशी शासन की क्रूरता पर काबू पाने की आवश्यकता के साथ ही साथ हमारे उपमहाद्वीप के गरीब और असंगठित लोगों को इस संघर्ष के लिए तैयार करना भी उस समय के राष्ट्रीय नेताओं के समक्ष भयावह चुनौती थी। विदेशी प्रभुत्व के खिलाफ हमारे संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण पहलु लोगों को अज्ञानता से बाहर निकालने की हमारे नेताओं की योग्यता और इसके परिणामस्वरूप एक भारतीय राष्ट्र के विचार का पुनरुत्थान था।






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