
मथुरा। शिक्षा जगत में लैपटाॅप का क्या महत्व है यह आज आप हर उस विद्यार्थियों देख कर महसूस कर सकते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए लैपटाॅप का आज ग्रामीण क्षेत्र, शहर के अधिकांश जगह मनोरंजन का साधन बन कर रह गया है। विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा में महारथ हासिल करने के लिए दिए लैपटाॅप दुर्दशा का शिकार हो गए। ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाई लिखाई के बजाय लैपटाॅप मनोरंजन का साधन और खिलौना बन गए हैं। सरकार के तकनीकी शिक्षा देने के सपने की सरे बाजार बिक्री हो रही है और कुछ व्यवसायिक वेबसाइट पर लैपटाॅप खुले आम बेचे जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इंटर पास कर उच्च शिक्षा जारी रखने वाले विद्यार्थियों को लैपटाॅप दिए थे। प्रदेश में लैपटाॅप वितरण मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना मानी गयी। सरकार की मंशा थी कि लैपटाॅप का उपयोग कर छात्र छात्राएं तकनीकी शिक्षा में महारथ हासिल करेंगे, लेकिन सरकार का यह सपना साकार होने से पहले ही टूटने लगा। ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थियों को मिले सरकारी लैपटाॅप मनोरंजन का साधन बन गए हैं। इनसे पढ़ाई लिखाई के बजाय मोबाइल डाउन लोडिंग होने लगी है। आज हालत यह है कि 50 फीसदी लैपटाॅप का फिल्म देखने एवं गाने सुनने में उपयोग हो रहा है। देखरेख के अभाव में 30 फीसद से ज्यादा खराब हो गए अथवा बेच दिए गए हैं।






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