मथुरा। दो महीने पूर्व हुई पुलिस अभिरक्षा में हिस्ट्रीशीटर की हत्या को लेकर मानव अधिकार द्वारा हस्तक्षेप किए जाने पर मंडलायुक्त ने शुक्रवार को जिला जेल में निरीक्षण किया तथा घटना को संज्ञान में लेते हुए पूछताछ की तथा विभागीय अधिकारी की इस जांच एवं मानवाधिकार आयोग की जांच में अंतर बताया है। पुलिस अभिरक्षा में उपचार को आगरा ले जाते वक्त राजेश टोंटा हत्याकांड के मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने प्रशासन से रिपोर्ट मांगी तो अब रिपोर्ट तैयार करने की शुरुआत हो गई है। इसी संबंध में जांच करने को मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर शुक्रवार को जिले में रहे। उन्होंने जेल में कैदियों से पूछताछ की। जिला जेल में 16 जनवरी की दोपहर में पहले गैंगवार और फिर इसके बाद देर रात में उपचार को आगरा ले जाते वक्त राजेश टोंटा की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। मानवाधिकार आयोग द्वारा राजेश टोंटा हत्याकांड मामले में संज्ञान लेते हुए प्रशासन से 13 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। इनमें हत्याकांड के दौरान तैयार विस्तृत रिपोर्ट, जेल में प्रवेश करते समय राजेश टोंटा के स्वास्थ्य की स्थिति, बीमारी के इलाज की स्थिति, टोंटा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा, विसरा रिपोर्ट, साइट प्लान, मजिस्ट्रीयल जांच रिपोर्ट, हत्याकांड के बाद कार्रवाई और विभागीय कार्रवाई का विवरण और सीबीसीआइडी जांच रिपोर्ट मांगी गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार के रिपोर्ट मांगने पर एडीएम कानून व्यवस्था एसके शर्मा को जांच सौंपी गई। इससे पूर्व शुक्रवार को सुबह ही मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर और अपर आयुक्त आरआर सिंह जेल में पहुंच गए। कमिश्नर ने गैंगवार वाली बैरक में कैदियों से पूछताछ करके घटना की जानकारी ली। इसके बाद जेल कर्मियों से भी इस संबंध में पूछताछ की। विभागीय अधिकारी इस जांच को मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट से अलग बता रहे हैं।





