
गोवर्धन परिक्रमा मार्ग के संत आश्रम में गंगा दशहरा के उपलक्ष्य में आयोजित गोष्ठी में शामिल संतगण
गोवर्धन। एक ओर जहां यमुना शुद्धीकरण को लेकर ब्रज में अलग अलग संगठनों द्वारा मुहिम चलाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार के इस ओर ध्यान न देने से संत समुदाय नाराज है। संत समुदाय का कहना है कि वे अपने अधिकारों का पहिचानें और संगठित होकर कार्य करें। किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है। पूरे भारत वर्ष में वर्तमान में लगभग 50 लाख हिन्दु संत हैं। अगर संतों ने अपनी संस्कृति की रक्षा की ठान ली तो स्वतः ही मां यमुना का शुद्धीकरण हो जाएगा।
गंगा दशहरा महोत्सव के उपलक्ष्य में परिक्रमा मार्ग के संत आश्रम पर श्रीरामधाम त्यागी आश्रम के महंत गिरीश महाराज की अध्यक्षता में संत गोष्ठी का आयोजन किया गया। महोत्सव का शुभारंभ गणेश जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर भागवताचार्य पं0 देवकी नदंन महाराज एवं गोपाल दास ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर गिर्राज संत सेवाश्रम के महंत राधामोहन दास रघुनाथ सिद्ध जी ने बताया कि गंगा दशहरा पर्व मनाने का उद्देश्य तभी पूरा जब हमारी संस्कृति की रक्षा करने वाली मां यमुना प्रदूषण से मुक्त होगी। यमुना के शुद्धीकरण के लिए कई वर्ष से अलग अलग संगठनों द्वारा यमुना शुद्धीकरण के अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन मां यमुना के हक की मांग की राजनीति की भेंट चढ़ गई। आज तक यमुना जी को लेकर न तो कोई कानून बनाया और न ही इस ओर पहल की। उन्होंने कहा कि संत अगर एकजुट होकर यमुना के शुद्धीकरण का आह्वान करें तो सफलता मिलने में देर नहीं होगी। भारतवर्ष में 50 लाख से ज्यादा संत हैं। सत्ता में बैठे लोगों को संतों की संख्या का अनुमान नहीं है। अगर संत जाग गया तो सरकार की आंख खुल जाएंगी। धार्मिक धरोहरों के रख रखाब की जिम्मेदारी शासन प्रशासन की है। आमजन का कार्य जागरूक होने का है। महोत्सव में श्रीराधा दामोदर सेवाश्रम की ओर से आचार्य संजय कृष्ण शास्त्री ने कहा कि गिरिराज महाराज की तलहटी में प्राचीन कुंड विलुप्त हो गये हैं। कई कुंड रख रखाब न होने से जीर्ण शीर्ण अवस्था में पड़े हैं। कार्यक्रम का संचालन देवकी नंदन महाराज ने किया। इस मौके पर बाबा मंगलदास, लाल दास त्यागी, उद्धव नारायण, माधव नारायण, ज्ञानेन्द्र दास, लक्ष्मण प्रसाद, ज्ञानेन्द्र दास आदि थे।






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