यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा बिखेर रही मिनी भारत की अनुपम छटा

ब्रजवासी ग्वाल की पौराणिक वेशभूषा में चलते ग्वाल बाल, आगे गऊ माता की अगुवाई और उसके पीछे बैलगाड़ी, और उसके पीछे घोडे की टाप के स्वर यह नाजारा होता इन एच 2 हाइवे के दिल्ली की ओर जाने वाली लेन को जो भोर होते ही हजारों ब्रजवासियों से हाइवे अट जाता है। 19 मार्च को पदयात्रा अपने पड़ाव पृथला से आगे बढी और हजारों ब्रजवासी अपने संकल्प पूर्ति के लिये दिल्ली की ओर बढने लगे। यमुना भक्तों की इस कदम चाल से अब दिल्ली में बैठी केन्द्र सरकार हिलने लगी है। पदयात्रा में चल रहे साधु सन्तों का कहना है कि दिल्ली में बैठी सरकार को दिल्ली से सैकड़ो किलोमीटरों दूर बह रही गंगा का ध्यान तो पर उसके साथ में उनकी नाक के नीचे बह रही यमुना की दशा उन्हे दिखाई नहीं दे रही है। ब्रज धाम में बह रही यमुना नदी में दिल्ली और आगे पड़ने वालो  शहरों के गन्दे नालों के गन्दा जल ही बह कर आ रहा है। 

इस बार यमुना भक्त हठ कर बढ रहे कि लौटेगे तो यमुना जल लेके नही ंतो लौटेगे ही नहीं। 

यमुना को लाने के लिये चल रही यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा  अपने आप में अनूठी है यात्रा में सबसे आगे गऊमाता, उसके बाद बैलगाडी, फिर घोड़े उसके बाद गुरूकुल के बच्चे और पदयात्री चल रहे है। यात्रा में ठाकुर जी के रथ और कई रंग शालाये चल रही है। यात्रा को अभूत पूर्व बनाने के लिये हजारों ब्रजवासी रोजाना ब्रज से आकर पदयात्रा में सम्मिलित होते है। इस तरह दिन में भीड़ 70 से 80 हजार के आस पास पहुॅच जाती है। 

यात्रा में 9 ब्रह्म रत्नों की रक्षा का सन्देश लेके यात्रा में चल रहा ब्रह्मरत्न जनचेतना रथ

ब्रह्मरत्न जन चेतना जाग्रति अभियान रथ के संचालक अत्रिमुनि ने कहा कि सनातन धर्म के मूल, गीता, गंगा, गाय, यमुना, साधू, भूमि, कन्या, तुलसी और वृक्षों की प्राचीन काल की भांति सेवा, पूजा, रक्षा अब सुनिश्चित अवश्य होनी चाहिये। 

 

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