कोर्ट ने पुलिस की दलीलें की खारिज
मथुरा। जवाहर बाग कांड के मुख्य मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव को न्यायालय ने अभी मरा नहीं माना है। इस संबंध में न्यायालय ने पुलिस की दी गई दलीलें खारिज करते हुए आदेश दिया कि शव की शिनाख्त परिजनों से और उसका जो विसरा है उसका डीएनए सीएमओ की मौजूदगी में कराये जाने के आदेश दिये हैं। न्यायालय द्वारा एक अन्य मामले में पूर्व में गैर जमानती वारंट अभी जारी रहेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार रवि सुरेशचंद दुबे ने 17 जून 2011 को 156(3) में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें रामवृक्ष एवं अन्य साथियों द्वारा जयगुरूदेव पेट्रोल पम्प, थाना हाईवे 10 मार्च 2011 को एक घटना की थी, जिसमें रामवृक्ष व उसके साथियों को अभियुक्त बनाया गया था। इसका ट्रायल चल रहा था। गुरूवार को इस केस की सुनवाई थी जिसमें इस केस में रामवृक्ष व उसके साथियों के गैर जमानती वारंट जारी थे। सुनवाई के दौरान थाना हाईवे के एक उपस्थित उपनिरीक्षक ने कोर्ट को यह बताया कि रामवृक्ष यादव अब जीवित नहीं है। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ कहा कि रामवृक्ष यादव की जवाहर बाग खाली कराने के दौरान उसकी मौत हो चुकी है। जिसकी शिनाख्त उसके साथ सह अभियुक्त ने भी की है। इस पर अपर जिला जज नवम् न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने आदेश दिया कि शव का जो विसरा है उसका डीएनए सीएमओ की मौजूदगी में हो तथा डीएनए का परिजनों से मिलान कराया जाए। कोर्ट को अगली सुनवाई में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाये।






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