
नई दिल्ली : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में भारत का अपना भुगतान कार्ड "रुपे" राष्ट्र को समर्पित किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने भारतीय रिजर्व बैंक को इस बात के लिए बधाई दी कि उसने 2005 में ऐसी स्वदेशी सेवा की आवश्यकता की परिकल्पना कर ली थी और यह कार्य 2010 में इसके संचालन के तुरंत बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम को सौंप दिया था। उन्होंने कहा कि कार्ड भुगतान नेटवर्क को पूरी तरह कार्य रूप देने में सामान्यत: पांच से सात वर्ष लग जाते हैं। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि एनपीसीआई ने रुपे सेवा को अप्रैल, 2013 में ही शुरू कर दिया था।
राष्ट्रपति ने कहा कि रुपे जैसे स्वदेशी प्रणाली न केवल भुगतान के नकदी और चेक पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि देश में विविध उपभोक्ता प्रणालियों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर आधारित वस्तुएं उपलब्ध कराना सरल बना देगी।
मुखर्जी ने कहा कि अब तक जारी 70 लाख कार्ड इस नेटवर्क की क्षमता का मात्र एक अंश हैं। पंजाब में दूध खरीदने वाली एजेंसियों या अनाज खरीदने वाली एजेंसियों द्वारा खरीद प्रीपेड कार्ड का शुभारंभ देश के भीतर विकसित भुगतान की विभिन्न प्रणालियों की एक किस्म है। उऩ्होंने कहा कि रुपे का राष्ट्र को समर्पण भारत में भुगतान प्रणाली के विकास और राष्ट्र निर्माण में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम में योगदान की परिपक्वता का प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एपी होता को बधाई दी। उऩ्होंने रुपे कार्ड से संबंधित 17 बैंकों को उनके योगदान के लिए सराहना पट्टिकाएं भी प्रदान की।
इस अवसर पर वित्त मंत्रालय के वित्त सेवा सचिव जीएस संधू, भारतीय बैंक एसोसिएशन के अध्यक्ष के आर कामथ और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के अध्यक्ष बालाचंद्रन एम भी उपस्थित थे।






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