वकील और लेखपाल की हड़ताल से तहसील परिसर में छाया सन्नाटा

मथुरा। तहसील परिसर में दो रोज पूर्व हुयी भगदड़ के बाद से पुलिस प्रशासन की ढील और जवाहरबाग के सत्याग्रहियों पर काबू न करने से सरकारी कर्मचारी आक्रोशित हैं। किसान और दूसरे राजनैतिक दलों के अलावा अब अधिवक्ता भी इस सब से खफा होकर हड़ताल पर हैं। बताया गया कि आज से तहसील में लेखपाल और कर्मचारी प्रशासन की ढुलमुल नीति के चलते हड़ताल पर हैं। उनके लोगों की पिटाई और जनसामान्य से अभद्रता से उनमें भय बना हुआ है। इसी के चलते उनकी हड़ताल शुरू हो गयी है जिसके समर्थन में राजीव भवन के कर्मचारी भी कूद पड़े हैं। वहीं अधिवक्ता भी कल से न्यायालयों में कार्य नहीं कर रहे। उनमें भी प्रशासन के रवैये से नाराजगी है। आज इसको लेकर दूसरे दिन भी वकीलों ने काम नहीं किया और विरोध प्रदर्शित किया। दूसरी ओर पुलिस-प्रशासन इस सब से निपटने के लिये अपने बड़े अधिकारियों से लखनऊ में संपर्क पर है। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पूरा प्रयास कर रहे हैं कि कैसे भी शांतिप्रिय ढंग से सत्याग्रहियों को वहां से हटा दिया जाये। वे नहीं चाहते कि टकराव से कोई खराब स्थिति बने। इसके लिये पूरी सूझबूझ े पुलिस प्रशासन वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के संज्ञान में मामला लाकर इसका हल चाहता है। आज लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष चै. वीरेन्द्र सिंह और मंत्री भगवान सहाय ने डीएम को संबोधित ज्ञापन में कहा कि जवाहरबाग में काबिज 250 सत्याग्रहियों द्वारा तहसील मंे आकर लेखपाल, अन्य कर्मचारियों, वकील और न्याय बोर्ड के कर्मचारियों पर प्रहार किया और कहा कि तहसील प्रांगण छोड़कर भाग जाओ। इस पर हमारा कब्जा रहेगा। इस निंदनीय घटना के कारण और भविष्य में अपनी सुरक्षा को लेकर लेखपाल संघ व अन्य संगठनों ने आकस्मिक निर्णय लेते कहा कि जब तक ये लोग काबिज रहेंगे तब तक हम कोई सरकारी कार्य नहीं कर पायेंगे। उन्होंने दावा किया कि समस्त तहसीलों में पूर्णतः तालाबंदी रहेगी। अमीन भी हड़ताल पर हैं। राजीव भवन के कर्मचारी भी उनके समर्थन में आ गये हैं। आज लेखपालों ने नारेबाजी करते हुये रजिस्ट्री विभाग में भी ताले जड़ दिये जिससे तमाम लोगों का कार्य नहीं हो पाया और रजिस्ट्रयां आधी-अधूरी रह गयीं।

 


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