इंदौर । विराट कोहली की अगुवाई में भारतीय टेस्ट टीम लगातार सफलता हासिल कर रही है। दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, वेस्टइंडीज को हराने के बाद भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भी सीरीज जीत ली है। तीन टेस्ट की सीरीज में भारत 2-0 से आगे हो गया है। तीसरा व अंतिम टेस्ट यहां के होल्कर स्टेडियम में 8 अक्टूबर से खेला जाएगा। कोहली की कप्तानी में भारत ने 16 में से 9 टेस्ट जीते और सिर्फ दो गंवाए जबकि पांच ड्रा रहे। वे भारत में एक भी टेस्ट नहीं हारे हैं। दो साल पहले टीम की कमान संभालने वाले कोहली का मानना है कि अच्छी कप्तानी की कुंजी साहसिक फैसले लेने और नतीजे की परवाह किए बिना उनका डटकर समर्थन करने में है। कोहली हालांकि खुद महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी के कायल हैं। उन्होंने बीसीसीआई टीवी से कहा कि कई बार फैसले लेना काफी कठिन होता है और इसके लिए काफी हिम्मत चाहिए होती है। मैंने धोनी से बहुत कुछ सीखा है। आपके फैसले सही या गलत हो सकते हैं लेकिन उन पर डटे रहने के लिए साहस चाहिए और यही कप्तान की निशानी है। कोहली का मानना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी ने उन्हें बेहतर क्रिकेटर बनाया है। उन्होंने कहा कि देश की टेस्ट टीम का कप्तान होना फख्र की बात है। मुझे इस पर गर्व है। मेरे लिए इससे बढक़र कुछ नहीं। इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुझे बेहतर क्रिकेटर बनने में मदद मिली। उन्होंने कह कि मेरे लिए सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना फख्र की बात है। टेस्ट क्रिकेट जैसी परीक्षा किसी और प्रारूप में नहीं होती। कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक तक पहुंची और उनका लक्ष्य इस लय को कायम रखना है। उन्होंने कहा कि हमें विश्व स्तरीय टीम बनना चाहिए है और हमारी टीम के हर खिलाड़ी के जेहन में यही है। आप किसी भी प्रारूप में खेलें, आपका लक्ष्य यही होता है। टेस्ट टीम को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में मुझे गर्व महसूस होता है और मजा आता है। खुद को आजमाने की यह चुनौती है और पूरी टीम के साथ एक लक्ष्य की ओर हम बढ़ रहे हैं। इसमें कोई दबाव महसूस नहीं होता। महान खिलाड़ी बनने के लिए आपको एक टीम के रूप में अच्छा खेलना होता है जिसके बाद ही निजी प्रदर्शन मायने रखता है। उतार-चढ़ाव तो आएंगे जब आपको आलोचना और नकारात्मक चीजों का सामना भी करना पड़ेगा लेकिन इसी में असल परीक्षा होती है।
साभार-khaskhabar.com






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