व्यंगकार डा0 राकेश शरद नहीं रहे

मथुरा। हास्य व्यंग के सुप्रसिद्ध कवि एवं व्यंगकार डा0 राकेश शरद का शनिवार को सायंकाल लगभग 6 बजे आगरा के पुष्पांजलि हॅास्पिटल में निधन हो गया। वह 58 वर्ष के थे। श्वाँस लेने में कष्ट होने पर उन्हें शनिवार को प्रातः भर्ती कराया गया था। डा0 राकेश शरद की बन्दरबाँट, व्यंग्यम् शरणम् गच्छामि, बर्र का छत्ता, उल्टा पुल्टा, चुनावोत्सव आदि कृतियाँ बहुचर्चित हुई थीं। उन्होंने हिन्दी के अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में ‘व्यंग्यम् शरणम् गच्छामि’ स्तम्भ लिखकर ख्याति प्राप्त की थी। डा0 राकेश शरद को काका हाथरसी ट्रस्ट द्वारा हास्य रत्न सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए थे। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन स्वरूप भाटिया ने डा0 राकेश शरद के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हजारों को हँसाने वाला कवि हजारों को रुलाकर चला गया। डा0 राकेश शरद की शवयात्रा रविवार को प्रतीक्षा एन्क्लेव, दयाल बाग आगरा से निकाली गयी।

 


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