
राजेश मल्होत्रा / एन देवन
भारत में बिजली संकट हमेशा से एक ज्वलंत मुद्दा रहा है। दिनों-दिन बिजली की कई गुणा बढ़ती मांग के साथ बिजली की 24 घंटे उपलब्धता की जरूरत ज्यादा से ज्यादा अहम होती जा रही है। एकीकृत बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) के शुभारंभ के साथ बिजली कटौतियां अब अतीत की बात हो जाएगी।
चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति मुहैया कराने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में देश के कोने-कोने तक पारेषण और वितरण नेटवर्कों को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाओं को मंजूरी दी है। एकीकृत बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) बिजली मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है और इसकी कोशिश देश में सभी को 24 घंटे बिजली सुनिश्चित करने की होगी।
केंद्रीय बजट 2014-15 में घोषित आईपीडीएस में उप-पारेषण नेटवर्क, मीटर लगाने, आईटी आवेदन, ग्राहक देखभाल सेवाओं, सौर पैनल के प्रावधानों को मजबूत बनाने और पुनर्गठित त्वरित बिजली विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) को पूरा करने की परिकल्पना की गई है। यह योजना एटी एवं सी नुकसानों में कमी लाने, आईटी सक्षमकारी ऊर्जा लेखांकन एवं लेखा परीक्षण प्रणाली की स्थापना करने, मीटर उपभोग पर आधारित बिजली बिल तैयार करने एवं संग्रहण कुशलता को बेहतर बनाने में मदद करेगी। शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के लिए मीटर लगाने समेत उप-पारेषण एवं वितरण नेटवर्कों को मजबूत बनाने के तत्वों के साथ वर्तमान योजना की अनुमानित लागत 32,612 करोड़ रुपये है जिसमें संपूर्ण क्रियान्वयन अवधि के लिए भारत सरकार से 25,354 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता की जरूरत शामिल है। वितरण क्षेत्र की आईटी सक्षमता का तत्व और 12वीं एवं 13वीं योजनाओं के लिए आरएपीडीआरपी के रूप में जून 2013 में आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) द्वारा मंजूर वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने की योजनाएं इस योजना में सम्मलित हो जाएंगी और 22,727 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता समेत 44,011 करोड़ रुपये की सीसीईए द्वारा मंजूर योजना परिव्यय आईपीडीएस की नई योजना में आगे बढ़ा दिया जाएगा।
निजी डिस्कॉम एवं राज्य बिजली विभागों समेत सभी डिस्कॉम इस योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए योग्य होंगी। डिस्कॉम विशिष्ट नेटवर्क जरूरत पर विचार करते हुए शहरी ढांचागत कार्यों को मजबूत बनाने को वरीयता देंगी और इस योजना के तहत आने वाली परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेंगी। इस योजना के तहत परियोजनाएं कार्य के लिए पत्र जारी किये जाने की तारीख से 24 महीनों की अवधि के भीतर पूरी हो जाएंगी। इस योजना के संचालन के लिए पावर फाइनेंस कार्पोरेशन नोडल एजेंसी है।
योजना के लिए अनुदान हिस्सा विशिष्ट वर्ग राज्यों के अतिरिक्त अन्य राज्यों के लिए 60 फीसदी (अनुशंसित उपलब्धि अर्जित करने पर 75 प्रतिशत तक) और विशिष्ट वर्ग राज्यों के लिए 85 फीसदी (अनुशंसित उपलब्धि अर्जित करने पर 90 प्रतिशत तक) तक है। अतिरिक्त अनुदान के लिए अपेक्षित उपलब्धियां हैं : योजना का समय पर पूरा होना, एटी एंड सी में अपेक्षित कमी और राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी को अग्रिम रूप से जारी करना। सिक्किम समेत सभी पूर्वोत्तर राज्य, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड विशिष्ट वर्ग राज्यों में शामिल हैं।
इस योजना के तहत अनुशंसित दिशा-निर्देशों के अनुरूप योजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए बिजली मंत्रालय, राज्य सरकार और डिस्कॉम के बीच एक उपयुक्त त्रिपक्षीय समझौता किया जाएगा जिसमें पावर फाइनेंस कार्पोंरेशन एक नोडल एजेंसी होगी। राज्य बिजली विभागों के मामलों में द्विपक्षीय समझौते होंगे।
शहरी क्षेत्रों में बिजली प्रणालियों के लिए एक आदर्श मानदंड, जोकि डिजिटल/ प्रीपेड मीटरिंग, 11 केवी का भूमिगत तार बिछाना और एलटी लाईन, एटीएंडसी नुकसान के लिए अधिकतम सीमा जैसे मानदंडों का निर्धारण करता है, केंद्रीय बिजली प्राधिकरण द्वारा 5 जनवरी, 2015 के भीतर तैयार कर दिया जाएगा।






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