मथुरा । नौहझील में सुबह चले लंबे घटनाक्रम के बाद अंततः प्रशासन के मनाने के उपरांत शहीद विजय चैधरी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। सैनिक सम्मान के साथ हुये अंतिम संस्कार में पूरा परिवार, गांववासी, आसपास के गांव के लोग, राजनैतिक दलों के नेताओं के अलावा एसडीएम मांट सहित हजारों लोग मौजूद रहे। अंतिम संस्कार करने से पूर्व सेना के कमाण्डेंट व अन्य सैन्य अधिकारियों से फोन पर हुयी बातचीत के बाद उसे शहीद का दर्जा दिये जाने का जब आश्वासन मिला तभी अंतिम संस्कार हो पाया। आज सुबह से इसको लेकर जद्दोजहद चलती रही। जवान की पत्नी, परिवार के लोग और गांववासी उसे शहीद का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे थे।
इससे पूर्व असम राइफल्स की बटालियन 20 एआर में तैनात ट्रेनिंग इंस्पैक्टर नौहझील के अनारगढी निवासी विजय चैधरी की मौत के बाद आज उसका शव नौहझील लाया गया लेकिन परिवार के लोग और गांववासी शहीद का दर्जा न मिलने तक दाह संस्कार न होने की बात पर अड़ गये और शव का दाह संस्कार नहीं किया। परिजनों का कहना था कि मृतक को शहीद का दर्जा जब तक न मिलेगा तब तक दाह संस्कार नहीं किया जायेगा। बताया गया कि असम राइफल्स में ट्रेनिंग इंस्पैक्टर के पद पर कार्यरत नौहझील के गांव अनरदागढी निवासी विजय चैधरी पुत्र वीरेन्द्र सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गयी थी। आज सुबह उसका शव उसके गांव लाया गया। सेना के अधिकारियों ने शव को परिजनों के पास रखा और कुछ देर बाद उसका दाह संस्कार कराने के लिये ले जाने लगे तभी परिजनों ने दाह संस्कार करने से मना कर दिया। गांव में मौजूद लोगों ने परिजनों का साथ देते हुये मृतक को शहीद का दर्जा दिलाये जाने की मांग की। मृतक की पत्नी ने कहा कि कल मुझे फोन आया था कि मेरे पति की गोली लगने से मौत हो गयी है। प्रशासन के अधिकारी उसे शहीद नहीं बता रहे हैं जबकि शव को लेकर आये सेना के लोग कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। जब तक मेरे पति को शहीद का दर्जा नहीं मिलेगा तब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं होने दिया जायेगा। मृतक की पत्नी ने कहा कि हमें सरकारी क्वार्टर, बच्चों के लिये अच्छे स्कूल में पढाई और गैस एजेंसी का लाइसैंस और शहीद का दर्जा मिलना चाहिये। वहीं शव को साथ लेकर आये सेना के लोग इस मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे।





