मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम में आयोजित पांच दिवसीय गुरुपूर्णिमा सत्संग-मेला के चैथे दिन आज बाबा पंकज महाराज ने े कहा कि सभी जीवों का घर सतलोक है। मनुष्य को सन्त-सत्गुरु का सुमिरन और ध्यान करना चाहिये। रूहानी सफर की दो मंजिलें होती हैं। पहली आंखों के नीचे इन्द्रियों के भोग और दूसरी आंखों के ऊपर है। जब तक हमारा ख्याल नीचे है, तब तक मालिक को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। जब ख्याल नीचे की तरफ रहता है, तो जाति-पांति, कौम-कौमियत के रंग में रंग जाते हैं। किसी चीज की याद को, सन्त सुमिरन कहते हैं। जब बाल-बच्चों का सुमिरन करते हंै, तो उन्हीं के चेहरों का ध्यान आ जाता है। जिसका चेहरा याद आता है, उसी से प्यार, मोह हो जाता है। मरते वक्त जहां हमारा ख्याल रहेगा, वहीं पर जन्म हो जायेगा। दुनियां में हमें बार-बार लाने वाली चीज है, दुनियां के सामानों का सुमिरन और ध्यान। महाराज ने कहा कि मन पर काबू केवल नाम अभ्यास से पाया जा सकता है। बिना करनी के कुछ मिलने वाला नहीं है। यदि पूरी उम्र खाना बनाने की किताब पढ़ते रहेंगे, तो कभी पेट नहीं भरेगा। मनुष्य बाहर चाहे जितना गुणी और ज्ञानी हो जाय, लेकिन अन्दर से अज्ञानी है। जब मनुष्य महापुरुषों के पास जाता है, तो उनके बताये हुये तरीके से सुमिरन और ध्यान करने पर दुनियां की तरफ से ध्यान हट जाता है। अब मनुष्य को यह मालूम हो चुका है कि जब ख्याल को अपने अन्दर में ले चलेंगे, तो आनन्द मिलने लगेगा। संस्थाध्यक्ष ने पर्यावरण प्रदूषण से बचने के लिये वृक्षारोपण करने की अपील की और आश्रम में अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का जिक्र किया। रूहों पर रहम करना सभी धर्मों का सार है। बिना शाकाहार अपनायें, अच्छे विचारों का प्रादुर्भाव व अच्छे समाज की रचना सम्भव नहीं है।





