सविता जी ने ज्ञान का दीप प्रज्वलित किया -स्वामी गुरुशरणानन्द

कृतज्ञता अनुश्ठानः ऐतिहासिक कार्यक्रम

अतीत की प्रतिभाएँ हैं वर्तमान में स्वर्णिम अध्यायः साध्वी दीदी माँ ऋतभंरा

मथुरा के इतिहास में ज्ञानदीप शिक्षा भारती परिसर स्थित श्री गुरुशरणाम् सविता सभागार में दिल्ली की राष्ट्रीय संस्था ’अवन्तिका’ के सौजन्य से आयोजित यह ऐतिहासिक कार्यक्रम था जिसमें समाज और राष्ट्र को विशिष्ट योगदान से गौरवान्वित करने वाले वरिष्ठजनों से लेकर सात वर्षीय बालिका को भी सम्मानित किया गया। खचाखच भरे सभागार में उपस्थित मथुरा, आगरा, दिल्ली आदि स्थानों के शिक्षाविद् और प्रमुख व्यक्तियों ने सम्मानित व्यक्तियों के अभिनन्दन में करतल ध्वनि कर हर्ष व्यक्त किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ सन्त प्रवर काष्र्णि स्वामी गुरुशरणानन्द जी महाराज तथा दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा  जी द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और सुश्री सविता भार्गव की प्रतिमा पर पुष्पांजलि के द्वारा हुआ। सभागार में ’अवन्तिका’ के राष्ट्रीय निदेशक डा0 आनन्द अग्रवाल ने स्वामी गुरुशरणानन्द जी महाराज, ज्ञानदीप की प्राचार्या श्रीमती निधि भाटिया ने दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा जी तथा ज्ञानदीप के सचिव मोहन स्वरूप भाटिया ने आयोजन के अध्यक्ष इलाहबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृŸा न्यायमूर्ति पालोक बसु का माल्र्यापण कर स्वागत किया।

इस अवसर पर ज्ञानदीप के सचिव मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि आज का कार्यक्रम कोई समारोह न होकर ज्ञानदीप की दिवंगत प्रधानाचार्या सुश्री सविता भार्गव की 28 वर्षों की सेवा के प्रति कृतज्ञता अनुष्ठान है और इसकी पृष्ठभृमि में मथुरा में कैंसर की चिकित्सा - व्यवस्था का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि देश में कैंसर का रोग बढ़ता जा रहा है और कैंसर हाॅस्पिटल नहीं है। मंत्री, राजनेता और अधिकारियों की सुरक्षा के नाम पर प्रतिदिन नष्ट हो रही 6 अरब की राशि को बचाया जा सके तो देश के हर जनपद में कैंसर हास्पिटल का निर्माण और निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था संभव है।’अवन्तिका’ के राष्ट्रीय निदेशक डा0 आनन्द अग्रवाल ने कहा कि बदलते परिवेश में कृतघ्नता के कारण कृतज्ञता की भावनाएँ समाप्त होती जा रही हैं किन्तु ज्ञानदीप द्वारा अपनी दिवंगत प्रधानाचार्या की सेवाओं का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाना और उसके साथ कैंसर हाॅस्पिटल की स्थापना का प्रयास सराहनीय है।

 

चेतन्या का चमत्कार

समारोह में कक्षा चार में अध्ययनरत नौ वर्षीय बालिका चेतन्या पांडे की चमत्कारी प्रतिभा से मंचस्थ विद्वान और दर्शक चमत्कृत हो उठे।

चेतन्या किसी भी विषय पर अंग्रेजी में पाँच घन्टों तक धाराप्रवाह बोलने में सक्षम है। 

स्वामी गुरुशरणानन्द जी महाराज तथा दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा जी को जब उसके सैकड़ों विभिन्न विषयों की सूची दी गई तो ऋतंभरा जी ने उससे राधा पर बोलने को कहा तो उसने राधाजी, श्री कृष्ण तथा स्वामी हरिदास जी के सम्बन्ध में प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत करते हुए सभी को आश्चर्यचकित कर दिया और सभागार में अनवरत तालियाँ गूँजती रहीं।

 

सम्मान - समारोह के अन्तर्गत भारत कोष के निर्माण में साधक की भाँति संलग्न आदित्य चैधरी, साहसपूर्वक संर्घषरत ग्रामीण युवती कु0 बबिता चैधरी, अपहरणकर्ता का साहस - शौर्य से संर्घष करने वाली 7 वर्षीय बालिका भूमिका, असाधारण प्रतिभा सम्पन्न 9 वर्षीय बालिका कु0 चेतन्या पाण्डे, आगरा के सेवाभावी चिकित्सक डा0 चन्दन कुमार, सिंगापुर में ’ब्रज आइडल’ से सम्मानित कु0 झनक नागर, एयर पिस्टल शूटिंग में कीर्तिमान स्थापित करने वाली कु0 मान्या अग्रवाल, आगरा के मनोविज्ञानवेŸाा डा0 महेश भार्गव, 1800से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित लिम्का बुक में नाम दर्ज कराने वाले दिल्ली के मात्र 16 वर्षीय रिशभ अरोड़ा, लखनऊ की लोकप्रिय सेवाभावी चिकित्सका डा0 शिल्पी सहाय, साँझी कला विशेषज्ञ सुमित गोस्वामी, माइक्रोसोफ्ट ( अमेरिका ) के संस्थापक बिल गेटस् का पाँच करोड़ वेतन का प्रस्ताव ठुकरा कर अपने देश को योगदान करने हेतु संकल्पित नोएडा के वीरेन्द्र सिंह तथा गाजियाबाद के साहित्यकार - पत्रकार विकास मिश्र सहित 14 विभूतियों को दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा जी ने उŸारीय उढ़ाकर,स्वामी गुरुषरणानन्द जी महाराज ने प्रशस्ति पत्र तथा न्यायमूर्ति पालोक बसु ने स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

समारोह के विशिष्ट अतिथि आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुल सचिव डा0 राम अवतार शर्मा ने कहा कि सविता जी द्वारा प्रषस्त सेवा का अध्याय ज्ञानदीप के इतिहास में अमर रहेगा। सुप्रसिद्ध कवयित्री डा0 शशि तिवारी ने कहा कि कर्Ÿाव्य पालन में अग्रणी रहीं सविता जी आज हमारा आदर्श हैं।

कार्यक्रम में सविता जी के जीवन एवं उपलब्धियों पर आधारित वृŸा चित्र के प्रदर्शन, प्रमुख संगीतकार विजय केलकर के निर्देशन में सुकवि राधागोविन्द पाठक रचित गीत ’बहुत दिन बीते करते याद’ तथा डा0 राजेन्द्र कृष्ण अग्रवाल की रचना ’झिलमिल झिलमिल याद तुम्हारी आती है जब सविता जी’ का संगीत शिक्षिका श्रीमती रश्मि शिखा ने गायन किया तो उपस्थित दर्शक अपने अश्रुओं को न रोक सके। 

दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि ज्ञानदीप द्वारा दिवंगत प्राचार्या सविता जी के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति आगे आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय होगी। स्मृतियाँ कभी मिट नहीं सकती, जो योगदान होता है वह इतिहास के माथे पर स्वर्णाक्षरों में अंकित हो जाता है। सविता जी की निष्ठा प्रखर ज्योति के साथ प्रज्वलित होती रहेगी आज की पीढ़ी और भविष्य की सन्तानों के लिए यह ज्योति मार्ग दर्शन करती रहेगी।

दीदी माँ ऋतंभरा जी ने आगे कहा कि आज जिन बाल प्रतिभाओं को यहाँ सम्मानित किया गया है उनमें अतीत की मेधावी प्रतिभा झाँक रही है और ये वर्तमान में स्वर्णिम अध्याय बनेंगीं।

सन्त प्रवर स्वामी गुरुषरणानन्द जी महाराज ने ’सविता’ और ’ज्ञानदीप’ के परस्पर तादात्म्य की व्याख्या करते हुए कहा कि सविता का अर्थ है सूर्य और ज्ञानदीप का अर्थ है ज्ञान का प्रकाश। सविता जी ने अपनी सेवाओं से अज्ञान की समाप्ति कर ज्ञान का दीप प्रदीप्त कर अनुकरणीय आदर्शों की प्रतिष्ठापना की।

उन्होंने कहा कि मात्र विवेक के अन्तर के कारण ही मनुष्य और पशु में भिन्नता होती है। विवेक गुरु के द्वारा प्रदान किया जाता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में गुरु को गोविन्द से भी अधिक महŸाा प्रदान की गई है। सविता जी ने गुरु के रुप में ज्ञानदीप का मार्ग दर्शन किया। ज्ञानदीप के कण - कण में उनकी साधना व्याप्त है। ’अवन्तिका’ संस्था द्वारा उनकी सेवाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त किया जाना सभी के लिए प्रेरणास्पद है। 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृŸा न्यायमूर्ति पालोक बसु ने अपने विद्वतापूर्ण सम्बोधन में कहा कि ईष्वर की अवधारणा तभी सार्थक होती है जब वे मनुष्य के रूप में अवतरित होते हैं। राम, कृष्ण,बुद्ध, ईसा आदि विभूतियाँ मनुष्य के रूप में न आतीं तो ईश्वर की कल्पना करना संभव नहीं होता। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि जो धर्म निर्धन, असहाय, विधवा और भूखे के आँसू न पौंछ सके उस धर्म की क्या पूजा करें ?

उन्होंने समारोह में सम्मानित मेधावी छात्र - छात्राओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि वे ईश्वर का रूप हैं क्योंकि वे प्रेम की भाशा जानते हैं।

पालोक बसु ने अपना उद्बोधन कबीर की साखी - ’पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोइ’ के साथ किया।

कार्यक्रम में पूर्व राज्य मंत्री मंत्री रविकान्त गर्ग, विधायक पूरन प्रकाश, जनपद न्यायाधीश दिनेश कुमार सिंह, अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी पवन कुमार श्रीवास्तव, पूर्व विधायक चैधरी बदन सिंह ,रश्मि अग्रवाल, विजय अग्रवाल शोरावाला, गोपाल प्रसाद प्रेस वाले, दिनेश दीवान एडवोकेट, दीपक गोयल, श्रीमती रश्मि अग्रवाल, श्रीमती प्रेमा भाटिया, श्रीमती आशा गोयल वीरेन्द्र मिश्र, रवि सरीन, कुशल पाल शर्मा, राजेश गुप्ता, सबरस मुसानी, अजय कुमार तैलंग, यतीन्द्र चतुर्वेदी, मोहित श्रीवास्तव, कु0 एकता अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, और आगरा से आये साहित्यकार डा0 श्रीभगवान शर्मा, डा0 राजेन्द्र मिलन, डा0 सुशील सरित, अशोक अश्रु, दैनिक प्रावदा ( अलीगढ़ ) के सम्पादक महेशचन्द्र सुहृद, आदि सहित अनेक शिक्षण संस्थाओं के प्रधानाचार्य और प्रतिष्ठित नागरिक बड़ी संख्या मे उपस्थित थे।

समारोह के अन्त में संयोजक डा0 भागवत कृष्ण नांगिया ने धन्यवाद किया। संचालन किया दूरदर्शन उद्घोषिका श्रीमती श्रुति पुरी तथा कवि जितेन्द्र विमल ने किया।

 

 

 

 

 


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