स्वामी गनेशीलाल स्मृति समारोह में बही संगीत की धारा

मथुरा। सूरदास ब्रज रास स्थली विकास समिति के तत्वाधान में स्वामी गनेशी लाल कौशिक का 23वां स्मृति समारोह विश्व लक्ष्मी नगर मंदिर प्रांगण में सम्पन्न हुआ। सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम का प्रारम्भ हुआ। कु॰ ज्योति कौशिक, कु॰ कीर्ति कौशिक ने राग मालकोस में छोटा ख्याल प्रस्तुत किया मालिनीयां गूथलायी कु॰ विदूषी कौशिक ने परमानन्द स्वामी की पदावली प्रस्तुत की। नन्दलाल सौ मेरो मन मान्यो कहा करेगो कोयरी। इन युवा कलाकारों को सुन श्रोता झूम उठे। डा॰ नटवर नागर ने स्वामी का परिचय दिया और कविता प्रस्तुत की। परासौली के लाल गनेशी पुष्टिमार्ग अनुयायी हवेली संगीत के गायक हरि गुण गायक थे। आकाशवाणी के युवा कलाकार भगवान दास शर्मा ने राग बिहाग में ख्याल प्रस्तुत किया तथा हवेली संगीत को राग कान्हरा में झूला का पद गाया। ध्रुपद गायक कन्हैया लाल चतुर्वेदी, सौरभ चतुर्वेदी ने अलाप सहित पर गायन किया। स्वामी जी के पुत्र आकाशवाणी ने राग मल्हार में सावन दुल्है आयौ, चार मास की लगन लिखायो। वदरन अम्बर छायौ। पद गायन किया। वादक कलाकार पखाबज पर मोहन श्याम पचोरी, तबला चेतन्य सांरगी पर मनमोहन कौशिक एवं परम कौशिक, हारमोनियम पर मयूर कौशिक तथा श्रीकांत दास थे। पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में नन्दकिशोर उपमन्यु एडवोकेट, मोहन स्वरूप भाटिया, कीर्तिपाल शर्मा, डा॰ सत्यदेव आजाद, अरूण वाजपेयी, मीनाक्षी वाजपेयी, डा॰ सुमन कुमार, एनके सिंह, रूचि कलिता, सुहाव आचार्य, नवीन वाष्र्णेय, चन्द्रेश अग्रवाल, डा॰ हेमेन्द्र चैधरी, डा॰ चन्द्रेश सिंह, रत्नेश द्विवेदी, सोनू झां, आकाशवाणी के मोहित कुमार, गुलाम साबिर, डोरी लाल गोला, गोविन्द गोला, डा॰ राजेन्द्र कृष्ण अग्रवाल, बाबू कौशिक, राजू शर्मा, मोदक कौशि। संचालन मनोज कौशिक ने किया तथा आभार डा॰ लावण्य कौशिक एवं मुकेश कौशिक ने व्यक्त किया। 


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