होली का रंग न शहर में न देहात में

मथुरा। होली का त्यौहार कभी पन्द्रह दिन पूर्व से नगर एवं देहातों में देखने को मिलता था। वह आज तक देखने को नहीं मिला है। इसका कारण लोग महंगाई, बेरोजगारी, कम आय के परिणाम उस पर मन में कोई हास परिहास की कमी होने आपसी प्रेम में कमी आने उस पर बर्दाश्त की कमी होने के परिणाम स्वरूप होली का त्यौहार सिर्फ मंदिरों तक ही सीमित रह गया है। शहर में होली का त्यौहार नजदीक आने के बाद भी अभी तक गली, मौहल्लो, बाजारों में होली का रंग गुलाल फिकता नहीं दिख रहा हैं। यही स्थिति कस्बो गांवों की भी है। जहां अभी तक होली का हुड़दंग देखने को नहीं मिल रहा है।

 


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