‘हरी तुम काहे प्रीत लगाय’

मथुरा। हवेली संगीत के ममृज्ञ गनेशीलाल कौशिक की स्मृति में संगीत समारोह में उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते अध्यक्षीय उदबोधन में मलूक पीठाधीश्वर राजेन्द्र दास महाराज ने कहा कि यह उनके द्वारा प्रदत्त संस्कारों का ही परिणाम है कि उनके सभी परिजन नित्य प्रति भजन संकीर्तन करते हैं और इसे बढावे को प्रयत्नशील हैं। दिल्ली से आयी डाॅ. रीता देव ने कहा कि शास्त्रीय गायन की जड़ें हिल रही हैं, श्रोता कम हो रहे हैं। हमें इसे बचाना होगा। अपनी प्रतिभा का अदभुत प्रदर्शन करते मीरा के पद ‘हरी तुम काहे प्रीत लगाये’, सावन की मल्हार गायीं। अन्य कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। दरभंगा से आनंद मलिक ने राग बिहार ;ध्रुपदद्ध में ‘पालनहार हरी नारायण तुम’ के बेजोड़ गायन से तालियां बटोरीं। पं. हरीबाबू कौशिक ने सारंगी से अपने पिता को श्रद्धासुमन अर्पित किये। ज्योति कौशिक ने ‘अलबेला सावन आयौ रे’ का गायन किया। संत राजा बाबा, ब्रजगरिमा संपादक विनोद चूड़ामणि, राजेन्द्र कृष्ण अग्रवाल, तुंगनाथ चतुर्वेदी, घनश्याम हरियाणा ने स्वामीजी को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का संचालन मनोज कौशिक ने किया व आभार मयूर कौशिक ने व्यक्त किया।


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