राजा के पलंग के चारों पाये कठपुतलियों की आकार में ढले थे। पूर्णमासी की रात को जादूगर के निर्देशन वाली छड़ी घुमाते ही कठपुतलियां नाच उठतीं। निर्देशानुसार बोलने लगतीं, गाने लगतीं, हँसने और रोने लगतीं।
राजा के पलंग के चारों पाये कठपुतलियों की आकार में ढले थे। पूर्णमासी की रात को जादूगर के निर्देशन वाली छड़ी घुमाते ही कठपुतलियां नाच उठतीं। निर्देशानुसार बोलने लगतीं, गाने लगतीं, हँसने और रोने लगतीं।