एक लघुकथा : 'समर्पण'

मैं एक मरती हुई भाषा बोलती हूं (थी!)। मार दी गई भाषा! तुमने कहा था कि तुम कोई भाषा जानते हो जो हमें हमारे गंवारूपन और उज्जड़ता से उबार ले जाएगी। और हम तो तमाम दूरियां लांघ आए जहां तक हमें विकास की दौड़ में पीछे धकेलती हमारी भाषा सुनी या बोली जा सकती थी।

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