30 फुट चैडी और 14 फुट ऊंची होली की आग से निकलेगा हीरालाल पंडा

अन्न जल त्याग 30 दिन की तपस्या पर बैठा पंडा

भक्त प्रहलाद का रूप धर तीस दिन के लिए त्यागा घर बार

मथुरा। कोसीकलां नगर के समीपवर्ती गांव प्रहलाद नगरी फालैन में प्राचीन परम्परा को निभाने के लिए इस बार 25 वर्षीय हीरालाल पंडा दहकती आग से निकलेगा। होलिका दहन वाले दिन लाखों नग्न आंखे इस दुर्लभ क्षण का साक्षी होगी। इस ऐतिहासिक मेले को लेकर ग्राम पंचायत सहित प्रशासन समुचित व्यवस्था करने का दाबा कर रही है। वहीं ग्रामीणों ने भी अपने घरों में रंगाई पुताई कर मेहमानों के स्वागत की पूरी तैयारी करनी शुरू कर दी है। इस ऐतिहासिक मेले के लिये प्रहलाद कोसीकलां के ग्राम फालैन का हीरालाल पुत्र राधेश्याम ने समस्त फालैन ग्रामवासियों के साथ ढोल-नगाडों एव भक्त प्रहलाद के जयकारो के बीच गांव की परिक्रमा की। प्रहलाद कुण्ड के समीप होलिका चैक पर विधि-विधान से एवं मत्रोच्चार से भूमि पूजन किया गया, जहां होलिका दहन वाले दिन विशाल होलिका को रखा जाऐगा। बताया गया है कि इस बार यहां करीब 30 वर्ग फुट के व्यास व करीब 14 फुट ऊंचाई की होलिका की स्थापना की जायेगी। जिसकी धधकती आग से हीरालाल निकलेगा। प्रहलाद नगरी फालैन में आगामी होली महोत्सव के दिन धधकती आग से निकलने वाला विश्व विख्यात फालैन का पंडा मंगलवार पूर्णमासी को अपने घर पूजा-अर्चना कर हीरालाल पंडा ने होलिका की उस भूमि का पूजन किया। पंडा ने बताया कि माघ शुक्ल की पूर्णमासी से न तो वह अपने घर जाएगा और न ही अन्न, जल सेवन करेगा मात्र प्रहलाद जी द्वारा आदेशित मत्रों का जाप प्रहलाद मदिर मंे उनकी प्रतिमा के समक्ष बैठकर केबल भक्त प्रहलाद का घ्यान करेगा। पंडा परिवार के कुल गुरू भगवान सहाय पुरोहित ने बताया कि ये प्राचीन परम्परा जब ये गांव भी विकसित नही हुआ था उससे पहले से ही चली आ रही है।

पूर्व मे 8 बार निकल चुके हैं पंडा के बाबा

विश्व विख्यात पंडा मेला को जीवंत रखने के लिए पूर्व में हीरालाल पंडा के बाबा स्वं कुमरपाल भी 8 बार होलिका से निकल चुके हैं हीरालाल पंडा की उम्र करीब 25 वर्ष है जिनके एक पुत्र है और करीब डेढ वर्ष पहले हीरालाल का विवाह हुआ है। उन्होने बतया कि इससे पहले उनके बाबा स्वं0 कुमरपाल सिह पडा 8 बार विशाल होलिका में प्रवेश कर निकल चुके है। उनका कथन था कि पंडा स्वं0 कुमरपाल साधना व आसन के पूज्य व्यक्ति थे जिनका बार्तालाव सीधे भक्त प्रहलाद से था गाव फालैन में प्रहलादजी के वंशजों के करीब 15 मकान गाव मंे स्थित है। और यह प्राचीन परम्परा वुजुर्गो ंके अनुसार सतयुग से चली आ रही है।

दीपक की लौ पर हाथ रख देता है अग्नि प्रज्जवलित करने के संकेत

होलिका दहन वाले दिन साय से ही देश-विदेश व प्रदेशों से श्रद्धालुओं का जमावडा प्रहलाद नगरी फालैन में लगना शुरू हो जाता है। पंडा अपनी तपस्या में लीन होकर अपने समक्ष जलते दीपक की लौ पर हाथ रख लगन तलाशता है जब तक अग्नि उन्हें गर्म लगती हैं तब तक वह प्रहलाद जी का ध्यान लगाये रहते हैं जब दीपक की लौ में शीतलता आती हैं। तब खुद पंडा विशाल काय होली में अग्नि प्रज्जवलित करने का संकेत देते हैं। पंडा समाज के कुल गुरू भगवान सहाय ने बताया कि इनके ही इनके ही संकेत पर होलिका में अग्नि प्रज्जवलित की जाती है। अग्नि के प्रवेश होते ही वह प्रहलाद कुण्ड में स्नान हेतु प्रस्थान करते है। 

कुण्ड से होलिका तक बहन दिखाती है रास्ता

जब पडा भक्त प्रहलाद मदिर से निकलकर स्नान हेतु प्रहलाद कुण्ड में प्रवेश करते है तो उनकी बहन सुक्कन अपने हाथ में दूध और गंगाजल का गंगासागर थामे प्रहलाद कुण्ड की घटटी पर खडी रहेंगी। जब पंडा स्नान कर बाहर निकलता है तो बहन होलिका में दूध और जल के छीटे मार अपने रौद्र रूप को हल्का करने का आग्रह करती है। बहन का इशारा पाकर पंडा पलक झपकते ही हसते खेलते अग्नि में दो या तीन कदम रख उस अगिन को पार कर जाता है और परिजन पंडा को साथ लेेकर समस्त परिवार भक्त प्रहलाद के दर्शन करते है। और सारे विश्व को एक सूत्र में पिराये रखने की कामना करते है।

 


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