आगरा में बरसात के बाद सड़कों की खराब हालत से पर्यटन को झटका


भारत के पर्यटन क्षेत्र का सिरमौर आगरा शहर बरसात के बाद हुई सड़कों की खराब हालत से उपजी समस्याओं से जूझ रहा है। बरसात के मौसम में शहरभर की सड़कें पानी से लबलबा गई हैं।

नए पर्यटन सीजन के आने के बावजूद, बेखबर शहर प्रशासन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की तत्काल आवश्यकता के प्रति पहले की तरह उदासीन बना हुआ है।

अंग्रेजी में पढ़ें : Agra's pathetic roads plague the tourism industry

इस मसले पर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य कहते हैं कि शहर का एक समय का राजसी आकर्षण इसके बुनियादी ढांचे की दयनीय स्थिति के कारण आज फीका पड़ गया है। इसके चलते निराश पर्यटक यहां से जल्दी लौट जाते हैं।

मानसून की लगातार बारिश ने शहर प्रशासन द्वारा गड्ढों को भरने और सड़क की मरम्मत पूरी करने के दावों की पोल खोल दी है। इस उपेक्षा का एक प्रमुख उदाहरण दयालबाग क्षेत्र की ओर जाने वाली सड़क है। यह सड़क घुटनों तक पानी में डूबी हुई है।

लोक स्वर के अध्यक्ष राजीव गुप्ता बताते हैं, "शहर को दुनिया से जोड़ने वाली आगरा की सड़कें अब सरकार की अपर्याप्तता और अपने नागरिकों व आगंतुकों की भलाई के प्रति उपेक्षा की याद दिलाती हैं।"

रिवर कनेक्ट कैंपेन के कार्यकर्ता चतुर्भुज तिवारी के अनुसार दयनीय सड़कों के गड्ढे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। दुर्घटनाओं और चोटों का जोखिम निवासियों और पर्यटकों दोनों पर मंडराता रहता है, जो आवश्यक बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार लोगों की घोर लापरवाही को उजागर करता है। जब आगंतुक टूटी हुई सड़कों और जीर्ण-शीर्ण बुनियादी ढांचे को देखते हैं, तो उनका उत्साह कम हो जाता है और इसके चलते उनका प्रवास छोटा हो जाता है। इससे पर्यटकों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है और स्थानीय व्यवसायों व आजीविका को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

अब समय आ गया है कि नगर प्रशासन अपनी उदासीनता की नींद से उठे और अपने नागरिकों और अन्य हितधारकों की मांग पर ध्यान दे। आगरा की सड़कें एक ऐसे शहर की जीवन रेखा हैं जो आगंतुकों की आमद और अपने पर्यटन उद्योग की जीवंतता पर ही पनपता है। उनकी उपेक्षा करना इतिहास और भव्यता से सराबोर शहर की विरासत को धोखा देना है।

सड़कों की मरम्मत और रखरखाव केवल सौंदर्यीकरण का मामला नहीं है, यह एक नैतिक अनिवार्यता है, शहर और उसके लोगों के प्रति एक कर्तव्य है। अधिवक्ता राहुल राज का मानना ​​है कि बहानेबाजी और आधे-अधूरे उपायों का समय बहुत पहले बीत चुका है।

सामाजिक कार्यकर्ता पद्मिनी अय्यर कहती हैं, "आगरा बेहतर सुविधाओं का हकदार है, इसकी सड़कें और बेहतरी की मांग करती हैं।"



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