साल 1925 में हिन्दुत्व की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित एक दल जनसंघ का अवतरण हुआ। श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बलराज मधोक, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी व मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं ने जनसंघ को सुदृढ़ करने के लिए अथक प्रयास किए और आज वही जनसंघ भाजपा के रूप में भारतीय राजनीति के मैदान में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में मौजूद है।
अपनी स्थापना के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इस पार्टी को पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। डा. केशव हेडगेवार व गुरु गोलवलकर ने इस पार्टी को अपना आशीर्वाद एवं संरक्षण प्रदान किया। संघ के स्वयंसेवकों ने भाजपा को अपने अथक संरक्षण से पल्लवित व पुष्पित किया।
भाजपा की स्थापना के कई वर्षों के बाद, खासकर मोदी काल के दौरान, पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों ने सामूहिक रूप से पार्टी का प्रसार तीव्र गति से किया जाने का निर्णय लिया। परिणामस्वरूप, विपक्ष के कई भ्रष्ट नेताओं को भी समाहित किया जाने लगा। इस कदम से भाजपा का प्रचार व प्रसार तीव्र गति से तो हुआ, किन्तु भाजपा गंगा नदी की तरह मैली होने लगी। कालान्तर में, दूसरे दलों से आने वाले नेता तो भाजपा की वाशिंग मशीन में साफ होने लगे लेकिन स्वयं पार्टी मटमैली होती चली गई।
भाजपा की वर्तमान स्थिति का आंकलन करें तो लगता है कि भ्रष्टाचारों के आरोपों से घिरे नेता भाजपा में समाहित होकर भस्मासुर का कार्य कर रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे वे इपनी पिछली पार्टी में किया करते थे। इन भस्मासुरों ने अपनी मूल पार्टी को तो पूर्व में ही भस्म कर दिया, अब उन्होंने भाजपा को भी भस्म करना शुरू कर दिया है। मोदी पर अब इन भस्मासुरों को भस्म करने का भी दायित्व आ चुका है। 74 साल के मोदी इस दायित्व को कितना पूर्ण कर पाएंगे, यह तो समय ही बताएगा। किसी स्वच्छ निर्मल जल को प्रदूषित करना तो बहुत ही सरल है, परन्तु अपशिष्ट जल को पुनः स्वच्छ एवं निर्मल करना बहुत कठिन कार्य होता है।

(लेखक आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। यहां व्यक्त विचार स्वयं उनके हैं)






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