उत्तर-पूर्वी भारत की ऊंची पहाड़ियों और घाटियों में एक शांत क्रांति हो रही है। यहां बदलाव बड़े-बड़े ऐलान के साथ नहीं आता बल्कि, यह अलग-अलग कूड़ेदानों की हल्की खड़खड़ाहट, गांव द्वारा चलाए जा रहे रीसाइक्लिंग यूनिट की धीमी आवाज़, और उन नागरिकों के पक्के कदमों से आता है जो अपनी ज़मीन को कचरे में डूबने नहीं देना चाहते...
Read More




